दिवाली की रात लोगों ने जहां उत्साह के साथ पर्व मनाया, वहीं आतिशबाजी व खेतों में जल रहे फसल अवशेषों के कारण शहर की आबो हवा पर बुरा असर पड़ा है। दिवाली की रात शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 312 तक पहुंच गया। जोकि सामान्य 185 रहता है। वायू का यह प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया है। वहीं, शहर में पटाखा बिक्री स्थल पर दिवाली के बाद बिखरे पॉलिथीन भी लोगों की लापरवाही को दर्शा रहे थे।
दिवाली की पूरी रात जले पटाखे
दिवाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार शाम 8 बजे से लेकर रात 10 बजे तक ही पटाखे जलाने थे। डीसी डा. प्रियंका सोनी ने इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। लेकिन पटाखे शाम को शुरू होकर रात्रि दो-तीन बजे तक बजते रहे। लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। इससे लोगों को काफी परेशानियां भी हुईं।
पटाखों के बारूद व खेतों की आग से बिगड़ा हवा का संतुलन
रात भर बजाए गए पटाखों व खेतों में कई जगह लगाई गई आग के कारण हवा का संतुलन बिगड़ गया और इसमें मौजूद तत्वों का अनुपात भी ऊपर-नीचे हो गया। एयर क्वालिटी इंडेक्स जो एवरेज 185 बताया गया है। वह कैथल में दिवाली की रात को 312 पहुंच गया। जिससे हवा के प्रदूषण की स्थिति का पता चलता है। रात को यह सबसे अधिक था। दोपहर 12 बजे के आस-पास इसमें थोड़ा सुधार भी हुआ।
लघु सचिवालय में प्रदूषक मापक यंत्र पड़ा है बंद
लघु सचिवालय में प्रदूषक मापक यंत्र लगाया गया है। लेकिन यह बिजली की कमी से बंद पड़ा हुआ है। लघु सचिवालय के प्रवेश द्वार पर लगाया गया यंत्र हर समय हवा की गुणवत्ता सहित अन्य जानकारियां देता है। लेकिन दिवाली की रात से यह बंद पड़ा है। बताया जा रहा है कि यहां सौर ऊर्जा के लिए उपकरण लगाए जा रहे हैं, जिस कारण इसे बंद किया गया है।
खेतों में जारी है पराली में आग लगाना
तमाम प्रयासों के बावजूद खेतों में पराली में आग लगाने की प्रक्रिया भी जारी है। प्रशासन द्वारा इस बार काफी संख्या में लोगों की पहचान की है। जिनके खिलाफ इसी सप्ताह कार्रवाई हो सकती है। डीडीए डा. पवन शर्मा ने लोगों से आह्वान किया कि वे खेतों में पराली व अन्य अवशेषों में आग न लगाएं। बल्कि सरकार द्वारा मुहैया करवाए गए उपकरणों की मदद से इन्हें नियंत्रित करके अपनी आय को बढ़ाएं। ताकि पर्यावरण का संतुलन भी बना रह सके और किसानों की आय भी बढ़ सके।
सीएमओ डा. सुरेंद्र नैन ने कहा कि दूषित वायू में सांस लेने से सांस के मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इससे फेफड़ों में तकलीफ बढ़ती है। साथ ही अन्य कई बीमारियां पैदा होने का खत्तरा बन जाता है।