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स्मॉग : सांस लेने लायक नहीं रही हवा, दृश्यता भी हुई कम

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राष्ट्रीय राजमार्ग से लगते हरियाणा के जिलों में पर्यावरण की स्थिति दयनीय हालत में पहुंच चुकी है। खेतों में पराली जलाने, दीपावली पर आतिशबाजी और प्रदूषण के अन्य कारणों की वजह से इन शहरों का वातावरण सांस लेने के लायक नहीं रहा। बुधवार देर शाम आठ बजे करनाल में एयर क्वालिटी इंडेक्स 391, अंबाला में 355, कुरुक्षेत्र में 393, पानीपत में 474, सोनीपत में 213 व यमुनानगर जिले में 347 आंका गया। वातावरण में प्रदूषण के 2.5-पीएम कणों का स्तर अधिक होने के कारण तीसरे दिन बुधवार को स्मॉग अधिक गहरा गई। इस कारण सुबह के समय दृश्यता कम हुई है। पूरा दिन स्मॉग का असर होने के कारण सूर्य की किरणों का वेग धरती पर अधिक प्रभाव से नहीं पड़ सका। वायु प्रदूषण का स्तर 51 से 100 तक भी हो तो संतोषजनक माना जाता है। 201 से 300 तक खराब और 301 से 400 तक अत्यधिक खराब माना जाता है।
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करनाल में बुधवार की शाम वायु प्रदूषण 2.5-पीएम का स्तर औसतन 388 न्यूनतम 345 व अधिकतम 442 रहा। 10-पीएम का स्तर औसतन 391, न्यूनतम 256 व अधिकतम 452 रहा। अंबाला में 2.5-पीएम का स्तर औसतन 355, न्यूनतम 303 व अधिकतम 437 रहा। 10-पीएम का स्तर औसतन 275, न्यूनतम 153 और अधिकतम 500 तक रहा। कुरुक्षेत्र में 2.5-पीएम का औसत स्तर 393, न्यूनतम 366 व अधिकतम 429 रहा। 10-पीएम का स्तर औसतन 360, न्यूनतम 298 व अधिकतम 432 के स्तर पर रहा। पानीपत में 2.5-पीएम का औसतन स्तर 474, 10-पीएम का औसतन स्तर 474, न्यूनतम 408 व अधिकतम 500 तक पहुंचा। सोनीपत में 2.5-पीएम का औसतन स्तर 99, न्यूनतम 66 व अधिकतम 176, 10-पीएम का औसतन स्तर 213, न्यूनतम 126 व अधिकतम 500 तक रहा। यमुनानगर में 2.5-पीएम का औसत स्तर 343, न्यूनतम 308, अधिकतम 427, 10-पीएम का औसत स्तर 290, न्यूनतम 185 व अधिकतम 500 रहा।
अस्थमा और हृदय रोगियों के लिए मार्निंग वॉक खतरनाक
रसायन शास्त्री डॉ. राकेश भारद्वाज ने कहा कि सुबह के समय साढ़े चार से सात बजे तक सबसे अधिक संवेदनशील समय है। जो लोग मार्निंग वॉक के लिए जाते हैं उनको ध्यान रखना होगा। खास तौर पर अस्थमा और हृदयरोग संबंधी लोगों को ज्यादा दिक्कत होगी। उन्हें मॉर्निंग वॉक पर नहीं जाना चाहिए। उनके लिए यह स्थिति बहुत ज्यादा घातक होती है। अब गला खराब होने संबंधी दिक्कतें पैदा होने लगी है। पानीपत जिले में स्थिति ज्यादा खराब है। जब तक बारिश नहीं होती या तेज आंधी नहीं आती तब तक वातावरण साफ नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि 2017 में दिल्ली में 10-पीएम स्तर 700 तक चला गया था। उस समय स्कूलों की तीन दिन की छुट्टी की गई थी। लोगों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई थी। तब बारिश से राहत मिल गई थी। यदि हरियाणा में एक अच्छी बारिश हो जाती है तो वातावरण साफ हो जाएगा। या बहुत तेज आंधी आने से भी इससे निजात मिल सकती है।
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