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किसी ने पीठ नहीं थपथपाई, पर लड़ते रहे पोलियो के खात्मे की लड़ाई

Tue, 25 Feb 2014 11:26 PM IST
कैथल
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अब जब भारत को पोलियो मुक्त देश घोषित किया जा चुका है तो गांव रोहेड़ियां निवासी रामफल सैनी के चेहरे पर सुकून के भाव दिखाई देते हैं। 19 साल से इस अभियान में एक तरह से गैर सरकारी सदस्य के तौर पर सक्रिय रामफल सैनी पोलियो उन्मूलन अभियान से जुड़े हुए हैं।
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आखिरी पोलियो उन्मूलन अभियान का हिस्सा बनकर वे गर्व महसूस कर रहे हैं। हालांकि इस कार्य के लिए आज तक उनकी न तो स्वास्थ्य विभाग और न ही जिला प्रशासन ने पीठ थपथपाई लेकिन इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि पोलियो की पीड़ा से वह भलीभांति वाकिफ थे। किस तरह से पोलियो एक व्यक्ति के जीवन को नरक बना देता है। विभाग द्वारा जब लगभग 19 साल पहले पल्स पोलियो उन्मूलन अभियान शुरू किया गया तो वह इसे सफल बनाने में जुट गए।

जब भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोलियो की दवा पिलाई गई, उन्होंने गांव रोहेड़िया में पोलियो बूथ पर सक्रिय सदस्य के तौर पर सेवा की। इस दिन वह अपने सभी कार्यों से छुट्टी ले लेते हैं। गांव में चौपाल में पहुंचने वाले बच्चों को तो दवा पिलाई ही जाती है, जो बच्चे वहां तक नहीं पहुंच पाते, उन्हें बाद में घर-घर जाकर दवा पिलाते रहे। आसपास के इलाकों में भी बच्चों को दवा पिलाते हैं। उन्हें इस बात का गर्व है कि पूर्व में भी उनके गांव में एक भी पोलियो का मामला नहीं था। जब से यह उन्मूलन अभियान चला, उसके बाद से तो लक्षण तक दिखाई नहीं दिए। न केवल दवा पिलाने बल्कि हस्ताक्षर अभियान चलाकर भी इस बारे में जागरूकता फैलाई। गांव में नेहरू युवा केंद्र द्वारा बनाए गए क्लब से जुड़ने के बाद समाज सेवा की प्रेरणा मिली थी। इसके बाद से वह पोलियो उन्मूलन अभियान में जुड़े हैं।
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इस बार खुशी दोगुनी
रामफल सैनी ने कहा कि रविवार से चलाए जा रहे आखिरी पोलियो उन्मूलन अभियान में भी उन्होंने बच्चों को दवा पिलाई है लेकिन इस बार सफलता की खुशी के कारण उनके इस कार्य में दोगुना उत्साह था। वह इस अभियान को चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के आभारी हैं। वह लोगों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए इसी तरह से प्रयासरत रहेंगे।
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