कैथल। डीसी अपराजिता ने कहा कि शिल्पकार और कारीगर समाज के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उनके हुनर को सम्मान और नई पहचान देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की ओर से पीएम विश्वकर्मा योजना चलाई जा रही है। योजना का लाभ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कार्य करने वाले पात्र कारीगरों को दिया जा रहा है। योजना में 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। इनमें नाव बनाने वाले, लोहार, सुनार, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, बढ़ई, टोकरी व चटाई बनाने वाले, खिलौना निर्माता, नाई, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के जाल बनाने वाले कारीगर शामिल हैं। उन्होंने पात्र कारीगरों से योजना के तहत जल्द पंजीकरण करवाकर लाभ उठाने का आह्वान किया। आवेदन का सत्यापन गांव में सरपंच और शहरी क्षेत्र में स्थानीय निकाय के पार्षद की ओर से किया जाएगा, ताकि आवेदक के संबंधित पारंपरिक व्यवसाय में कार्य करने की पुष्टि हो सके।