प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2014 में अपने मन की बात में अधिकारियों को बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने के सुझाव दिए गए थे। उसपर अमल करते हुए मानव संसाधन मंत्रालय ने आदेश जारी किए थे कि प्रथम श्रेणी अधिकारी राजकीय स्कूलों में जाकर बच्चों के साथ संवाद स्थापित करेंगे। लेकिन शायद जिले के अधिकारियों के पास इसके लिए समय नहीं हैं। तभी तो करीब महीना भर पहले आदेश जारी होने के बावजूद अभी तक किसी अधिकारी ने ऐसा करने की जहमत नहीं उठाई है। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को जीवन में सफल होने के लिए प्रेरित करना है।
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इन आदेशों में कहा गया था कि क्लास वन ऑफिसर स्कूलों में जाकर बच्चों की रुचि के मुद्दों पर बात करेंगे। अपने जीवन व अधिकारी बनने के सफर के बारे में जानकारी देंगे, सरकार की योजनाओं के बारे में बात करें। ताकि बच्चों का उत्साह बढ़े। उनमें भी कुछ बनने की इच्छा जागृत हो। आदेशों में कहा गया था कि अधिकारी संबंधित स्कूल में जाकर करीब 20 से 25 मिनट तक बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने के बाद उस लेक्चर की रिपोर्ट तैयार करें। इसे मंत्रालय को भेजा जाएगा।
जिले में स्कूल अलॉट करके रिपोर्ट प्रस्तुत करने के जारी हो चुके हैं आदेश
जिले में एडीसी, डीडीपीओ, एसडीएम, सीटीएम सहित 10 अधिकारियों को स्कूल अलॉट करते हुए आदेश जारी हो चुके हैं। इन अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। लेकिन विभाग को अभी तक किसी भी अधिकारी ने लेक्चर देकर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की हैं।
अधिकारी जाएं, तो प्रेरित होंगे सरकारी स्कूलों के बच्चे
इन निर्देशों का यदि पालन होता है तो निश्चित तौर पर सरकारी स्कूलों के बच्चे प्रेरित होंगे। उन्हें कुछ करने व बनने की प्रेरणा मिलेगी। अब देखना यह है कि जिले में अधिकारी कब तक इन बच्चों के लिए समय निकाल पाते हैं।
जिले में इन आदेशों के तहत स्कूल अलॉट कर निर्देश जारी कर दिए गए थे। पता लगाया जाएगा कि किस अधिकारी ने कब कक्षा ली या नहीं।
रविप्रकाश गुप्ता, डीसी, कैथल।