कार्यक्रम में भाग लेते हुए महिलाएं व अन्य।
राजौंद। ब्रह्माकुमारीज के तत्वावधान में श्री दादा खेड़ा के प्रांगण में संगम गौरवपूर्ण वृद्धावस्था व सम्मानित जीवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत उपस्थित नागरिकों को ईश्वरीय संदेश दिया गया और सभी से अपने बड़े-बुजुर्गों के सम्मान का संकल्प भी दिलवाया गया।
इस दौरान ब्रह्माकुमारी आशा बहन ने संगम प्रोजेक्ट की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य समाज में बढ़ते पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव को संतुलित करना और परिवारों में बुजुर्गों को उनका उचित सम्मान दिलाना है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में संयुक्त परिवार व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। इसके कारण बुजुर्गों को भावनात्मक सहारा नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को भौतिक सुख-सुविधाओं से अधिक अपने बच्चों, बहुओं और नाती-पोतों के स्नेह और आत्मीयता की आवश्यकता होती है।
परिवार के सदस्यों का प्रेमपूर्ण स्पर्श और संवाद उनके लिए सबसे बड़ा सुख होता है। दादा-दादी और नाना-नानी के साथ बच्चों का भावनात्मक जुड़ाव परिवार को मजबूत बनाता है। आशा बहन ने कहा कि बुजुर्ग अनुभव और प्रेरणा के स्रोत होते हैं। जो व्यक्ति अपने बुजुर्गों का सम्मान करता है, उसके जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि बनी रहती है। बुजुर्ग परिवार की नींव, शान और सुरक्षा का आधार होते हैं।
कार्यक्रम में भाग लेते हुए महिलाएं व अन्य।