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Kaithal News: खिलाड़ी खेलते रहे पर नई खेल नीति से हार गए, काट रहे चक्कर

Sun, 15 Sep 2024 03:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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राजिंद्र तंवर
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कैथल। पिछले छह वर्षों से हरियाणा में इनलाइन स्केटिंग हॉकी व रोलर स्केटिंग हॉकी के हजारों खिलाड़ी अपना खेलते रहे पर नई खेल से हारकर हाशिये में पहुंच गए। दरअसल, इन्हें खेल पॉलिसी से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में इन खिलाड़ियों को राज्य में मिलने वाली तमाम सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हरियाणा सरकार व खेल विभाग ने इनलाइन स्केटिंग हॉकी, रोलर स्केटिंग हॉकी, रोलर स्केटिंग, वूशु, क्याकिंग व पॉवर लिफ्टिंग को खेल पॉलिसी से बाहर कर दिया दिया था। फिर हरियाणा सराकार व खेल विभाग ने लगभग तीन महीने के बाद दोबारा से रोलर स्केटिंग, वूशु, क्याकिंग व पॉवर लिफ्टिंग को खेल पॉलिसी में शामिल कर लिया लेकिन इनलाइन स्केटिंग हॉकी, रोलर स्केटिंग हॉकी से किनारा काट लिया। ऐसे में हरियाणा में दोनों खेलों के लगभग 10 हजार खिलाड़ियों का भविष्य अंधकार में चला गया है। ये सभी इन खेलों को खेल पॉलिसी में शामिल करवाने, खेल अवार्ड लेने व खेल ग्रेडेशन प्रमाणपत्र के लिए दर-दर भटक रहे हें पर नतीजा सिफर है।
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पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, पूर्व खेल मंत्री अनिल विज, पूर्व मुख्य सचिव हरियाणा सरकार अशोक खेमका से भी वे मिलकर अपनी बात रख चुके हैं पर उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला।

इनलाइन स्केटिंग हॉकी व रोलर स्केटिंग हॉकी के खिलाड़ी, नवीन, पार्थ अग्रवाल, तनिषा चौधरी, मुस्कान अग्रवाल, दीपांशी बंसल, नीव बजाज, तन्मय वत्स, लक्ष्य गोदरा, आर्यन मिगलानी व प्रिंस मलिक ने बताया कि यह स्थिति दुखद है।

उन्होंने बताया कि 20 वर्षों से इनलाइन स्केटिंग हॉकी, रोलर स्केटिंग हॉकी, रोलर स्केटिंग, वूशु, क्याकिंग व पॉवर लिफ्टिंग आदि खेल पॉलिसी से तहत सुचारू रूप से चल रहे थे ओर इसमें सैंकड़ों खिलाड़ी पुरस्कार भी जीत चुके हैं। इनलाइन स्केटिंग हॉकी व रोलर स्केटिंग हॉकी खेलों के दम पर कई खिलाड़ी सरकारी नौकरी भी पर कार्यरत हैं। सरकार को इन खेलों के खिलाड़ियों के भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए। संवाद
कई पदक जीते पर लाभ नहीं

20 वर्षीय खिलाड़ी पार्थ अग्रवाल ने बताया कि वह इनलाइन हॉकी का राष्ट्रीय खिलाड़ी है। वर्ष 2018 में कुरुक्षेत्र में, 2019 में विशाखापट्टनम में रजत पदक जीते पर खेल नीति में बदलाव की वजह से उसे कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। हमें न कोई कैश अवार्ड मिल रहा ओर न ही काई हमें ग्रेडेशन प्रमाण पत्र मिल रहे हैं।

नौकरी में नहीं कर सकते आवेदन

खिलाड़ी तनिषा चौधरी ने बताया कि वह चार बार राष्ट्रीय खेलों में पदक जीत चुकी है पर नई खेल नीति से हमें नुकसान उठाना पड़ रहा है। हम हरियाणा में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन तक नहीं कर सकते हैं और न ही किसी खेल कोटे से किसी यूनिवर्सिटी में नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। हमारे बारे में सरकार को सोचना चाहिए।

ऐसे तो भविष्य अंधकार में

खिलाड़ी नवीन ने बताया कि वह कई वर्षों से इनलाइन स्केटिंग हॉकी की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक जीत चुके हैं पर खेल नीति की वजह से हमारा भविष्य अंधकार में चला गया हैं। खेल विभाग से हमें कोई ग्रेडेशन प्रमाणपत्र या कैश अवार्ड नहीं मिल पा रहा है। हरियाणा सरकार इसे खेल पॉलिसी में शामिल करे, हमारी यही मांग है।

ये खेल भी पॉलिसी में शामिल हों

खिलाड़ी प्रिंस मलिक ने बताया कि वह रोलर स्केटिंग हॉकी खेलते हैं पर हरियाणा की नई खेल नीति की वजह से आगे भविष्य तय नहीं कर पा रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार इन खेलों को भी खेल पॉलिसी में शामिल करे ताकि हजारों खिलाड़ियों का तनाव दूर हो सके। सरकार के सकारात्मक रुख से हम सभी िखलाड़ियों को संबल मिलेगा।
हरियाणा सरकार ने इनलाइन स्केटिंग हॉकी व रोलर स्केटिंग हॉकी को खेल पॉलिसी से बाहर रखा है। इसी वजह से संबधित खिलाडि़यों के ग्रेडेशन प्रमाणपत्र व कैश अवार्ड भी वर्ष 2018 से बंद किए गए हैं। खेल पॉलिसी का ये निर्णय हरियाणा सरकार व उच्च अधिकारियों का है। इन खेलों से संबंधित जानकारी हरियाणा खेल विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन मौजूद है। जिससे खिलाड़ी इन साइट से संबंधित गाइडलाइन ले सकते हैं। -राजरानी, जिला खेल अधिकारी
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क्या है मामला
गौरतलब है कि खेल विभाग की ओर से विभिन्न खेलों को ओलंपिक और नॉन ओलंपिक श्रेणी में विभाजित किया गया है। स्केटिंग नॉन ओलंपिक में आती है। स्केटिंग के तहत रोलर हॉकी, रोलर स्केटिंग, इन लाइन हॉकी हैं। 12 जुलाई 2018 को हरियाणा खेल नीति 2015 के तहत प्रदेश के खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग की ओर से आदेश जारी कर स्केटिंग के इनलाइन हॉकी, क्वार्ड हॉकी, रोलर स्केटिंग के इवेंट्स को बाहर कर दिया था। इन खेलों के खिलाड़ियों ने प्रदर्शन कर आवाज भी बुलंद की पर अब तक नतीजा सिफर रहा है।
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