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Kaithal News: कभी खुद चैपियन बनीं पिंकी, अब युवाओं को निखार रहीं

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बच्चों की ​खिलाते हुए अध्यापिका पिंकी। संवाद - फोटो : ट्रामा सेंटर में प्राथमिक उपचार के बाद आगरा एंबुलेंस से निशा को ले जाते परिजन। संवाद
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सोनू थुआ
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कैथल। अध्यापिका पिंकी देवी ने अपने खेल जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया। तलवारबाजी के उपकरणों की कमी और प्रतियोगिताओं के लिए पैसों का इंतजाम करना मुश्किल था। किसान परिवार से होने के बावजूद उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में कई पदक जीते। अब वह शिक्षा विभाग में पीटीआई अध्यापिका के रूप में बच्चों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं।
पिंकी ने 11वीं कक्षा में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय किठाना में तलवारबाजी शुरू की थी। स्कूल के डीपी दिनेश सैनी ने उन्हें इस खेल के लिए प्रेरित किया। पर्याप्त उपकरण न होने पर भी वह नियमित अभ्यास करती थीं। उनके पिता पाला राम और माता सेवापति ने परिवार का सहयोग किया। आर्थिक तंगी के कारण कई बार प्रतियोगिताओं में भाग लेना चुनौती बन जाता था।
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उन्होंने 2013-14 में आंध्र प्रदेश के कुरनूल में राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। 2014 में पंचकूला में राज्य स्तरीय तलवारबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। 2015 में रोहतक में रजत पदक और फरीदाबाद व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कांस्य पदक हासिल किए। 2017 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय खेल परिषद की प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने राज्य स्तरीय चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीता।

खेल उपलब्धियां और सरकारी सेवा
पिंकी ने 2019-20 और 2022 में अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालय तलवारबाजी प्रतियोगिताओं में भाग लिया। तलवारबाजी के अलावा, उन्होंने 2018 और 2019 में ऊंची कूद में तीसरा स्थान प्राप्त किया। 2019 में उनकी खो-खो टीम उपविजेता रही। हैंडबॉल में उनकी टीम ने तीसरा स्थान हासिल किया। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें मास्टर डिग्री के बाद पढ़ाई रोकनी पड़ी। नवंबर 2022 में उन्होंने एक निजी कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया।
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बिना कोचिंग हासिल की सफलता
पिंकी ने निजी कॉलेज में पढ़ाते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के स्वयं पढ़ाई कर हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की। मुख्य परीक्षा भी उन्होंने सफलतापूर्वक पास की। जून 2024 तक निजी कॉलेज में अध्यापन के बाद उनका चयन हुआ। वह सरकारी सेवा में टीजीटी शारीरिक शिक्षा अध्यापिका के पद पर नियुक्त हुईं। पिंकी मूल रूप से थुआ गांव की रहने वाली हैं।
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ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर
पिंकी अब राजौंद ब्लॉक के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सौंगरी गुलियाना में बच्चों को प्रशिक्षण दे रही हैं। स्कूल के बाद वह चार घंटे तक अभ्यास करवाकर ग्रामीण क्षेत्र के बेटे-बेटियों को खिलाड़ी बना रही हैं। उनके मार्गदर्शन में बच्चे राज्य स्तर पर पदक जीत चुके हैं। एक छात्रा का अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ है। वह थुआ गांव में 100 से अधिक लड़कियों को भी खो, कबड्डी व तलवारबाजी सिखा रही हैं।

बच्चों की खिलाते हुए अध्यापिका पिंकी। संवाद- फोटो : ट्रामा सेंटर में प्राथमिक उपचार के बाद आगरा एंबुलेंस से निशा को ले जाते परिजन। संवाद

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