सेगा वासियों ने पीएचडी डा. राजेंद्र सेगा को सरपंच चुना है। कृषि कार्य में लगे डा. राजेंद्र सिंह नेट क्वालीफाइड भी हैं। वे कॉलेज प्राध्यापक लगने के लिए प्रयासरत हैं। इसी बीच ग्रामीणों ने अपने गांव की कमान भी उन्हें सौंप दी है। डॉ. राजेंद्र को कुल 1975 मतो में से 878 मत मिले। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार को 330 मतों से पराजित किया। राजेंद्र ने बिना पैसा खर्च किये चुनाव जीतकर मिशाल कायम की।
डा. राजेंद्र ने बताया कि अक्सर गांवों में पंचायत चुनाव में पैसा खर्च करके लोगों को लुभाने का प्रयास किया जाता है। लेकिन उन्होंने पूरे चुनाव में कोई ज्यादा राशि खर्च नहीं की। केवल आवश्यक चुनावी खर्च के लिए ही पैसा खर्च किया। राजेंद्र ने बताया कि चुनाव प्रचार के लिए भी पोस्टर व बैनर का बेहद सीमित मात्रा में प्रयोग किया। केवल लोगों को चुनाव चिह्न बताने के लिए ही पोस्टर छपवाए थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1997 में गांव में युवा सेवा समिति बनाकर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप काम करना शुरू किया और 2001 में इनेलो के युवा विंग जिला उप प्रधान चुने गये। वे दो बार इनेलो के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के जिला महासचिव रहे, और वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं।
कड़े मुकाबले में 15 से वोटों से जीतीं चानचक की सरपंच
कैथल। चानचक गांव की एससी वर्ग से दसवीं पास नवनिर्वाचित सरपंच बलबीरो देवी ने कड़े मुकाबले में अपने प्रतिद्वंद्वी को पटखनी दी। वे 15 वोटों से विजयी रहीं। उसने कुल 736 मतों में से 365 वोट हासिल किए। बलबीरो ने बताया कि उन्हें चुनाव का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन कड़ी मेहनत और विकास के प्रति प्रतिबद्धता से जीत हासिल हुई। गांव की पक्की गलियां, पीने का शुद्ध पानी, साफ-सफाई के कार्य करेंगी। खुले में शौच न करने के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे बिना किसी दबाव के गांव के विकास के लिए स्वतंत्र फैसले लेंगी। सरकार ने शैक्षणिक योग्यता लागू करके अच्छा काम किया, क्योंकि पढ़ा-लिखा व्यक्ति अच्छे ढंग से कार्य कर सकता है।