संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला/चीका। केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के हरियाणा में दाखिल होने के प्रमुख मार्गों पर लगातार 34 दिनों से बैरिकेडिंग होने के कारण रविवार को भी टटियाना बॉर्डर बंद रहा और लोगों को, खासकर कृषि के कार्य जाने वालों किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अंबाला शंभू बॉर्डर व खनौरी बॉर्डर पर हो रहे प्रदर्शन के कारण राज्य को पंजाब से जोडऩे वाला चीका से पटियाला स्टेट हाईव मार्ग बंद है। यहां भारी संख्या में सुरक्षा बल भी तैनात है। इसी कारण यात्री पिछले 34 दिनों से धक्के खा रहे हैं। दसवीं की बोर्ड परीक्षा में जा रहे छात्रों, आंगनबाड़ी में काम करने वाली महिलाओं व स्कूली अध्यापकों ने बताया है कि प्रदर्शन के कारण बहुत दिक्कत और देरी हो रही है।
ऐसे में सामान लेकर अपने छोटे बच्चों के साथ आने वाले कई यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों को अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर पैदल ही हरियाणा-पंजाब सीमा पार करनी पड़ी। चीका शहर में दिहाड़ी-मजदूरी के लिए आने वाले लोग भी बॉर्डर सील होने से परेशान हैं। किसान आंदोलन 2.0 का असर अब कारोबार पर दिखने लगा है।
सड़क बंद होने से आम आदमी के साथ-साथ व्यापारियों को भी परेशानी हो रही है। अब इस आंदोलन का असर जनता की जेब पर भी पडऩे लग गया है। बॉर्डर खोलने के संबंध में जब स्थानीय अधिकारियों से भी बात की जाए, तो उनका एक ही रटा रटाया जवाब होता है कि उनके पास न तो बॉर्डर खोलने के आदेश हैं और न ही फिलहाल ऐसी कोई जानकारी है।
दुकान भी हो जाएगी बंद ः पटियाला रोड पर मार्बल मार्केट की दुकान चलाने वाले हरजीत सीड़ा ने बताया कि टटियाना बंद होने के बाद से काम खत्म हो गया है। यहां हर रोज पंजाब से सैकड़ों लोग आते थे, लेकिन अब कोई नहीं है। दुकान चलाना भी मुश्किल हो गया है।
विकल्प के तौर पर खोले रास्ता ः मार्बल व्यापारियों ने कहा कि किसान अभी तक यहां नहीं आए हैं, लेकिन पुलिस ने पहले ही रास्ते बंद कर रखे है । यह गलत है। जब तक किसान आसपास या हरियाणा में नहीं आ जाते पुलिस को टटियाना बॉर्डर पर आने-जाने के लिए विकल्प का रास्ता रखना चाहिए।