संवाद न्यूज एजेंसी
पूंडरी। फतेहपुर में स्थित माता मनसा देवी मंदिर का इतिहास करीब 300 साल पुराना है। आसपास के लगभग 30 गांवों के लोग माता मनसा को अपनी कुलदेवी मानते हैं। यहां पर दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं। इस मंदिर में माता मनसा देवी पिंडी रूप से विराजमान हैं।
पिंडी रूप में विराजमान मां मनसा देवी का यह मंदिर पूरे वर्ष श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है, लेकिन नवरात्रों में भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। मंदिर में साल में दो बार—शारदीय और चैत्र नवरात्रों में—विशाल मेले का आयोजन होता है।
सप्तमी के दिन मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें कई किलोमीटर तक लगी रहती हैं। इन दिनों मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण देखने लायक है। लाखों श्रद्धालु देश के कोने-कोने से आकर मां के दर्शन करते हैं।
व्यवस्था और सुरक्षा
मंदिर के पुजारी पंडित संजीव शर्मा बताते हैं कि आज भी पूजा-अर्चना प्राचीन परंपरा के अनुसार की जाती है। मंदिर का अब आधुनिकीकरण हो चुका है और इसकी देखरेख पंजीकृत कमेटी करती है। नवरात्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष प्रबंध किए जाते हैं। पुलिस के साथ-साथ गांव के युवा और स्वयंसेवक सुरक्षा व व्यवस्था में सक्रिय रहते हैं।
मंदिर बहुत प्राचीन है। मान्यता है कि यह 300-400 साल पुराना है। कहा जाता है कि यहां पर नवरात्र के दिनों में की गई विधिवत पूजा मनोवांछित फल प्रदान करती है। इसी वजह से नवरात्रों में यहां भक्तों की लाइन लगी रहती है। -संजीव शर्मा, पुजारी
मंदिर स्थापना की कथा
मंदिर के इतिहास से जुड़ी एक प्राचीन कथा के अनुसार, फतेहपुर गांव के मेहर सिंह वालिया को स्वप्न में मां मनसा देवी ने दर्शन देकर बताया कि वे मोहना गांव के मदबल तालाब में पिंडी रूप में विराजमान हैं। शुरुआत में मेहर सिंह ने इस स्वप्न को महत्व नहीं दिया, लेकिन अगली रात फिर वही सपना आया।
सुबह उन्होंने परिवार को बताया और ग्रामीणों के साथ मोहना पहुंचे। वहां तालाब में उतरते ही उनके पैरों से पिंडी स्वरूप टकराया। इसे ढोल-नगाड़ों के साथ फतेहपुर लाकर मंदिर में स्थापित किया गया। तब से यहां मां पिंडी रूप में विराजमान हैं।