संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। सेक्टर-20 की जर्जर सड़कों को लेकर क्षेत्रवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने सड़कों पर उतरकर नगर परिषद, जिला प्रशासन और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से वे बदहाल सड़कों के कारण भारी परेशानी झेल रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही।
सेक्टर-20 निवासी मंगत राम चहल, सुभाष सेतिया, प्रवीण बिढ़ान, अमर गुगलानी, विनेश महत्ता, सुशील गर्ग, विनोद मदान, मिंकू खन्ना और रानी ने बताया कि क्षेत्र की स्थिति से प्रशासन पूरी तरह अवगत होने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने नगर परिषद के अधिकारियों, कर्मचारियों और वार्ड पार्षद के समक्ष कई बार अपनी समस्या रखी, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ।
लोगों का कहना है कि सेक्टर में करोड़ों रुपये के मकान बने हुए हैं, लेकिन सड़कों की हालत बेहद खराब है। गलियों से निकलना मुश्किल हो गया है। इसी सेक्टर से डीएवी स्कूल के बच्चे रोजाना आवागमन करते हैं। टूटी सड़कों के कारण आए दिन बच्चे स्कूटी और साइकिल से गिरकर घायल हो रहे हैं।
बारिश में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। सड़कों पर बने गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे वाहन चालक गिरकर चोटिल हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में उनकी परेशानी दोगुनी हो जाती है।
सड़कों पर जगह-जगह गड्ढों से दोपहिया वाहन चालक आए दिन गिरकर चोटिल हो जाते हैं। अंधेरे में दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है। कई लोगों की गाड़ियों का सस्पेंशन खराब हो चुका है, वहीं लगातार झटकों के कारण कमर दर्द जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। हल्की सी बारिश होते ही ये गड्ढे तालाब का रूप ले लेते हैं, तब मुसीबत बढ़ जाती है।
आरोप ः परिषद कार्यालय के काट रहे चक्कर
सेक्टर-20 के निवासियों ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों से वार्ड पार्षद और नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले नगर परिषद के ईओ मौके का निरीक्षण करने भी आए थे, लेकिन इसके बाद उनका तबादला हो गया और मामला वहीं अटक गया। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सेक्टर-20 की सड़कों की मरम्मत और निर्माण कार्य तुरंत कराया जाए, ताकि उन्हें इस बदहाली से निजात मिल सके।
सीवरेज की समस्या... बीमारी को खुला निमंत्रण
सड़कों की खस्ताहाली के साथ-साथ सेक्टर-20 की सीवरेज प्रणाली भी लोगों को परेशान करती है। अक्सर मैनहोल ओवरफ्लो हो जाते हैं, जिससे सड़कों पर गंदा पानी जमा हो जाता है। इस दूषित पानी से उठने वाली तेज दुर्गंध ने लोगों का घरों में रहना तक मुश्किल कर दिया है। सीवरेज के ढक्कन और गड्ढे अपनी मूल स्थिति खो चुके हैं और कई स्थानों पर ऊंचे-नीचे हो गए हैं, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है।