कैथल। फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग के अधिकारियों ने कैथल उपमंडल अधिकारी सतीश नारा की अगुवाई में क्योड़क, तितरम, नरड, जगदीशपुरा गांव के किसानों को जागरूक किया। नारा ने कहा कि फसल अवशेष जलाना सामाजिक बुराई ही नहीं बल्कि कानूनी अपराध भी है और इससे प्रकृति, जमीन तथा मानव जीवन पर अत्यंत गंभीर व प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट होने के साथ-साथ प्राकृतिक प्रदूषण की वजह से लोग भी अनेक जानलेवा बीमारियों का शिकार होते हैं।
किसान पराली जलाने से बिल्कुल परहेज करें। उन्होंने यह भी कहा कि अवशेष प्रबंधन कर सभी किसान एक सभ्य नागरिक होने का परिचय दें और समाज के प्रति अपनी सकारात्मक जिम्मेदारी निभाएं। फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसानों को सरकार की ओर से प्रति एकड़ एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जा रहे हैं। किसी भी सूरत में किसान पराली न जलाएं बल्कि अवशेष प्रबंधन कर जमीन की उर्वरा शक्ति को बचाए रखें।
कृषि विभाग के बीईओ जगबीर लांबा ने कहा कि पराली जलाकर किसान सिर्फ अपनी जमीन को ही बंजर नहीं बना रहे बल्कि पर्यावरण प्रदूषण की वजह से भविष्य में कैंसर, अस्थमा इत्यादि जानलेवा बीमारियों को भी सीधा निमंत्रण दे रहे हैं। किसानों को पराली की गांठें बनानी चाहिए। इससे पर्यावरण में प्रदूषण होने से भी बचेगा। साथ ही किसान गेहूं की बिजाई सुपर सीडर मशीन से धान के अवशेषों में भी कर सकते हैं। मशीन से बिजाई करने पर किसानों को खेत में काम खाद डालने की जरूरत पड़ती है। फसल अवशेष खेत में सड़कर अच्छा खाद फसल को देते हैं।