रोडवेज डिपो में लंबे समय से बसों की कमी बनी हुई है, जिससे स्थानीय रूटों पर यात्रियों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में डिपो में केवल 120 बसें चलने योग्य हैं, जबकि सभी रूटों पर सुचारू सेवा के लिए 250 बसों की आवश्यकता है। इस भारी अंतर के कारण, लोकल रूटों पर बसों के फेरे कम हो गए हैं और यात्रियों को कई बार घंटों तक बस का इंतजार करना पड़ता है। विशेष रूप से कुरुक्षेत्र, जींद और असंध रूट पर यह समस्या ज्यादा बढ़ गई है।
स्थानीय यात्री अमित और सुरेश ने बताया कि उन्हें बस के लिए एक से दो घंटे इंतजार करना पड़ता है और जब बस आती है, वह अक्सर पूरी तरह भरी होती है। इससे यात्रा करना कठिन और असुविधाजनक समस्या होती हैं। यह स्थिति शाम आठ बजे के बाद और भी कठिन हो जाती है। इस समय के बाद तो जैसे रोडवेज की बसों पर ब्रेक लग जाते हैं। यात्री बसों के इंतजार में खड़े रहते हैं, लेकिन बसों का कोई अता-पता नहीं होता।
समस्या का मुख्य कारण पुराने वाहनों का लगातार खराब होना और नई बसों की समय पर आपूर्ति न होना है। इसके कारण सभी रूटों पर नियमित अंतराल पर बसें उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा है। बुजुर्ग, महिलाएँ और रोजाना स्कूल-कॉलेज या काम पर जाने वाले लोग इस स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि बसों की संख्या बढ़ाई जाए और लोकल रूटों पर नियमित सेवा सुनिश्चित की जाए। डिपो प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि बसों की कमी को जल्द ही पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। संवाद
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रोडवेज जीएम कमल ने कहा कि रोडवेज बेडे में नई बसें आनी हैं। अभी भी सामंजस्य बैठाकर सभी रूटों पर बसों का संचालन किया जा रहा है। यात्रियों को परेशानी नहीं होने दी जा रही।