संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ने प्रोफेसर कॉलोनी स्थित आश्रम में एक दिवसीय संस्कारशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में नैतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का पुनर्जागरण करना रहा।
संस्कार शाला में उपस्थित अभिभावकों को संबोधित करते हुए साध्वी बहन ने समझाते हुए कहा कि प्रत्येक बालक में एक स्वाभाविक प्रतिभा होती है। इसकी अनदेखी कर बच्चों को किसी और क्षेत्र में जबरन प्रवृत्त करना माता-पिता की सबसे बड़ी भूल है। यह आवश्यक नहीं कि जो बच्चा पढ़ाई में उत्कृष्ट न हो, वह जीवन में सफल नहीं हो सकता। उदाहरणस्वरूप, सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट और लता मंगेशकर ने संगीत में अपनी प्रतिभा के बल पर ही प्रसिद्धि पाई।
साध्वी बहन ने कहा कि कुछ बच्चे जन्मजात प्रतिभा से संपन्न होते हैं और यह किसी भी क्षेत्र—संगीत, गायन, नृत्य, चित्रकला, खेलकूद या अभिनय—से संबंधित हो सकती है। जिस क्षेत्र में बच्चे की रुचि अधिक हो, अभिभावकों को चाहिए कि उसे प्रोत्साहित करें ताकि बच्चा किसी दबाव के बिना सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच सके। कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण, ध्यान सत्र, नैतिक कहानियां, योग व आत्म-संयम की विधियां मुख्य आकर्षण रहे।