संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका/कैथल। अजीत नगर गांव के निवासी पैरालंपिक तीरंदाज हरविंदर सिंह को पद्मश्री पुरस्कार मिलेगा। इसे लेकर इलाके में खुशी की लहर है। वे जिले के पहले व्यक्ति हैं जिन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलेगा। उनका हौसला, लगन और मेहनत युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। उन्होंने दिखाया कि हौसलों में जान हो तो दिव्यांगता भी सफलता के रास्ते नहीं रोक सकती है।
पद्मश्री के लिए चयन होने के बाद विशेष बातचीत में तीरंदाज हरविंदर सिंह ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और देश के लिए कुछ करने का जुनून हर समय जिंदा रखा। उन्होंने बताया कि पद्मश्री पुरस्कार मिलना किसी भी व्यक्ति के लिए गौरव की बात होती है। यह मेरे लिए भी बहुत ही खुशी के पल हैं। उन्होंने कहा कि पद्मश्री मिलने से उन्हें नहीं, बल्कि पूरे देश को गर्व है। इस सम्मान के लिए चुने जाने पर उनके कोच जीवनजोत सिंह तेजा व गौरव शर्मा ने उन्हें मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दी हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी शुभकामनाएं दी हैं।
गौरतलब है कि हरविंदर के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा। उन्होंने चुनौतियों से कभी भी हार नहीं मानी और परेशानियों का डटकर सामना किया। उनकी कहानी युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उनका जन्म 25 फरवरी 1991 को जिला कैथल के उपमंडल गुहला के गांव अजीत नगर के किसान परमजीत सिंह के घर हुआ था। हरविंदर जब डेड़ साल के थे तो उन्हें डेंगू हो गया था। उन्हें इंजेक्शन लगाए गए तो दुर्भाग्य से इंजेक्शन के कुप्रभावों से उनके पैरों की गतिशीलता चली गई।
हरविंदर को शुरुआत में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन पटियाला यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उनका रुख तीरंदाजी की तरफ हो गया और फिर उन्होंने तीरंदाजी में ही कॅरिअर बनाने का फैसला कर लिया। हरविंदर का खेल सफर 2012 में पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला से शुरू हुआ। उन्होंने 2018 एशियन पैरा गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। 2021 टोक्यो पैरालंपिक में कांस्य, 2024 पेरिस पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।