जाखौली की कमान पट्टी के सरपंच रतन सिंह ने अपने प्रमाणपत्र को लेकर दी गई शिकायत को झूठा करार दिया है। सरपंच का कहना है कि उनका प्रमाणपत्र असली है और वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि चुनाव में हारे हुए प्रत्याशी द्वारा हार के बाद ऐसी शिकायत की जा रही है।
बातचीत में रतन सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हारा हुआ प्रत्याशी उसके खिलाफ झूठी शिकायतें दे रहा है। उन्होंने कहा कि 1982 में आठवीं फेल और भविष्य में पढ़ाई न करने का दावा सरासर झूठा है। उन्होंने वर्ष 1983 में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी से आठवीं कक्षा पास की थी।
उन्होंने कहा कि 31 साल बाद दसवीं पास करना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सभी नियमों का पालन करते हुए दसवीं कक्षा पास की है। उनके सर्टिफिकेट की जांच की जा सकती है।
नवनिर्वाचित सरपंच ने कहा कि उनके प्रमाणपत्र में छत्तीसगढ़ बोर्ड का पता बिलासपुर स्पष्ट तौर पर लिखा हुआ है। इस बोर्ड द्वारा ली गई परीक्षाओं को हाईकोर्ट छत्तीसगढ़ ने भी वैध माना है। उन्होंने कहा कि झूठी शिकायतों के आधार पर बेवजह परेशान करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा गांव में चुनाव हारने के बाद आपसी रंजिश के कारण इस तरह की शिकायतें की जा रही हैं। सरपंच रतन सिंह ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य गांव का विकास करवाना है। वे गांव में आपसी रंजिश और झगड़ों को बढ़ावा नहीं देंगे।