कलायत। गांव ब्राह्मणीवाला के इतिहास में पहली बार एक ब्राह्मण सरपंच बना है। यह भी एक संयोग ही रहा कि सरपंच के चुनाव में उतरे दोनों प्रत्याशी रिश्ते में चाचा-भतीजा ही लगते थे। चाचा एमए बीएड तो भतीजा एमएससी कंप्यूटर साइंस, दोनों में कांटे की टक्कर थी। आखिर अनुभव ज्ञान पर भारी पड़ा व सेवानिवृत्त चाचा राजकुमार शर्मा ने सुनील कुमार को 154 मतों से हरा दिया। ब्राह्मणीवाला में चुनाव इस कदर खिंचा हुआ था कि कुल 1270 वोटों में से 1248 वोट पोल हो गए।
बलदेव सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी रामफल को 573 वोटों से हराया
कलायत। प्रशासन द्वारा घोषित अति संवेदनशील गांव चौशाला ने प्रशासन को दिए विश्वास पर खरा उतरकर साबित कर दिया कि यह गांव अति संवेदनशील नहीं अति शांत गांव है। शनिवार को गांव के लोगों ने बैठक बुलाकर निर्णय लिया था कि चाहे पुलिस प्रशासन न भी आए गांव के लोग अपने स्तर पर ही शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव करवाकर दिखा देंगे। रविवार सुबह से ही गांव के ठुलेदारों ने कमान संभाल रखी थी। मतदान के दौरान किसी भी प्रकार की कहासुनी तक नहीं हुई और चार बजे शांति के साथ मतदान संपन्न हो गया। पिछली सरपंच सीमा देवी के पति बलदेव सिंह ने अपने एकमात्र प्रतिद्वंद्वी रामफल को 573 वोटों से पराजित कर दिया।
गांव कमालपुर के बुजुर्गों ने दिखाया बड़प्पन, सुभाष को मिली विजयश्री
कलायत। गांव कमालपुर में मतदान को लेकर बुजुर्ग पूरी तरह से चाकचौबंद रहे। चुनाव में सुभाष व मुन्नी देवी के बीच सीधा मुकाबला रहा। ब्राह्मण बाहुल्य गांव में चुनाव को लेकर काफी रोचक मामला बना हुआ था। गांव के लोगों का कहना था कि परिणाम कुछ भी हों गांव में शांति व भाईचारा बरकरार रहना चाहिए। गांव के बुजुर्ग मतदान केंद्र के बाहर अलाव जला हुक्का पंचायत में बैठ कर सारी स्थिति की समीक्षा करते रहे तथा सबसे अंत में मतदान किया। सुभाष शर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मुन्नी देवी को करीब 720 वोटों से हराया।