पंचायत चुनाव में पानी की निकासी एक बड़ा मुद्दा बन सकता था लेकिन कहीं भी इसकी कोई चर्चा तक नहीं है। पानी का निकास गुहला के तमाम गांवों की सबसे बड़ी समस्या है। घरों का पानी जोहड़ों में जा रहा है। गंदे पानी से जोहड़ प्रदूषित हो रहे हैं। पानी में से बदबू उठ रही है।
पशु भी इन जोहड़ की तरफ मुंह नहीं करते। अकसर ओवरफलो हो जाने का कारण जोहड़ों का पानी गांवों की गलियों में फैल रहा है और आए दिन के झगड़ों का कारण भी बन रहा है मगर पूरे चुनावी परिदृश्य में कहीं भी कोई भी उम्मीदवार इसका जिक्र तक नहीं कर रहा। सारी की सारी चुनावी कवायद गांव की ग्रुपबाजी, जातीय जोड़-तोड़ और सेवा बाड़ी तक सीमित होकर रह गई है।
चीका शहरी क्षेत्र से सटे गांव सदरहेड़ी में लोग पीने के पानी को लेकर बहुत परेशान हैं। गांव में कई साल पहले एक जलापूर्ति केंद्र बना था तथा लोगों को घर-घर कनेक्शन भी दिए गए थे, लेकिन जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा मंजूर न होने के बाद इस जलकेंद्र पर छह सात साल से ताला लटका है। पिछली पंचायत ने हालांकि गांव में कई स्थानों पर छोटे ट्यूबवेल लगवा दिए थे।
पानी आने के टाइम यहां महिलाओं की लंबी कतारें लग जाती हैं तथा जल्दी पानी भरने के चक्कर में महिलाओं में तकरार होना रोज की बात है। जोहड़ सारा साल पानी से ओवरफ्लो होकर गांव के घरों तक फैला रहता है। गफलत में गिरकर दो साल पहले यहां एक बच्चे की मौत भी हो चुकी है।
लोकल बनाम पंजाबी मुद्दा
सदरहेड़ी में जाकर लोगों से चुनाव के मुद्दे की बात की तो बोले कि यहां तो मुद्दा लोकल बनाम पंजाबी है। एससी सीट है। एक उम्मीदवार के बुजुर्ग पंजाब से आकर यहां बसे थे। गांव अगौंध में प्लस टू का स्कूल है, लेकिन अध्यापक नहीं हैं। सरकारी अस्पताल सिर्फ नाम का है। बड़ा गांव है इसलिए यहां एक बड़े कम्युनिटी हॉल की तत्काल जरूरत है। तालाब जलकुंभी से अटे पड़े हैं। अरसे से सफाई नहीं हुई। पशुपालक परेशान हैं। गांव के बहुत सारे रकबे का भूजल खारा होने के कारण खेतों में नहरी पानी की जरूरत है। उम्मीदवार लोगों को बीपीएल राशन कार्ड बनवाने, बुढ़ापा पेंशन लगवाने तथा इंदिरा आवास योजना आदि का धनलाभ दिलवाने के वादे परोसकर अपना वोट बैंक पक्का करने की कोशिश में हैं।
दिन में दो घंटे बिजली
गांव टटियाणा में बिजली दिन में केवल दो घंटे आती है। गांव में पंचायती जमीन पर नाजायज कब्जा है। पशुओं को पानी पिलाने के काम आने वाले तीन जोहड़ में से दो जोहड़ गांव भर की नालियों से बहकर आने वाले गंदे पानी से अटे पड़े हैं। कोलां वाला टोबा अब समतल मैदान है और उस पर घर पनप आए हैं। चीका जाने के लिए बस स्टाप है पर बस यहां नहीं रुकती। स्कूली बच्चों को पैदल ही चीका आना पड़ता है। बावजूद इन सबके टटियाणा गांव में चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा सेवा बाड़ी है।
जरूरी सुविधाओं का जिक्र तक नहीं
गांव नंदगढ़ में आवागमन से लेकर स्कूल तक अनेक तरह की समस्याएं हैं लेकिन चुनाव मुद्दों में गांव की जातीय ग्रुपबाजी हावी है। गांव सींह में बिजली की पुराने पड़ चुके तार आए दिन बिजली व्यवस्था ठप होने का कारण बनते हैं पर चुनावी मसला जाट बनाम नान जाट बना हुआ है। कहीं भी गांव के विकास की कोई चर्चा नहीं है। गांव भाटियां और लालपुर में शराब सबसे बड़ा मुद्दा है तो गांव डंडोता में पिछली पंचायत का हिसाब किताब मुख्य मसला है। गांव थेह नेवल में मुख्य मुद्दा पंचायती जमीन को लेकर है। गांव में 416 एकड़ पंचायती जमीन है।
यहां पर वादों में है कुछ बात
भूंसला क्षेत्र के छोटे से गांव में उम्मीदवार कुछ सार्थक बात करते नजर आए। मात्र 385 वोट वाले इस गांव में चाचा-भतीजा आमने सामने हैं। अन्य गांवों की तरह पानी की निकासी यहां भी सबसे बड़ी समस्या है। चुनाव में खड़े दोनों उम्मीदवारों की तरफ से गांव में शहरों की तरह सीवर बिछाकर तालाब को साफ सुथरे सरोवर में बदलने के वादे किए जा रहे हैं। एक उम्मीदवार प्राइमरी स्कूल की चहारदीवारी बनवाने की बात करता है तो दूसरा श्मशानघाट को पक्का करवाने के वादे कर रहा है।