पाई। जिले के सबसे बड़े गांवों में शुमार पाई का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों स्वयं इलाज की मांग कर रहा है। आठ बिस्तरों वाला यह सरकारी अस्पताल लगभग 50 हजार की आबादी की सेहत का सहारा है, लेकिन इसकी खुद की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
भवन की हालत बेहद खस्ता : स्थानीय निवासी संजय ढुल, वीरेंद्र, महावीर, दिलबाग, सत्यवान और राजेश आदि ने बताया कि अस्पताल की दीवारों से ईंटें झड़ रही हैं और बारिश में छतें टपकती हैं। क्वार्टर पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिससे लोग डरते-डरते इलाज के लिए आते हैं। कभी भी कोई दीवार गिर सकती है—यह डर सभी के मन में बना रहता है।
ग्रामीणों की मांग: नई बिल्डिंग और सामुदायिक केंद्र का दर्जा : ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि इस भवन को आधिकारिक रूप से जर्जर घोषित कर इसके स्थान पर नई बिल्डिंग का निर्माण किया जाए। साथ ही, इसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से अपग्रेड कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया जाए, ताकि बढ़ती आबादी की स्वास्थ्य जरूरतें पूरी हो सकें। उनका सुझाव है कि नया अस्पताल पूंडरी-राजौंद मुख्य मार्ग पर गांव के भीतर बनाया जाए, जिससे लोगों को सुविधा भी मिले और यातायात में भी सहूलियत हो। संवाद
सरपंच ने भी सरकार को भेजा प्रस्ताव
इस बारे में सरपंच राजबाला और सरपंच प्रतिनिधि नरेश ढुल ने बताया कि पंचायत की ओर से सरकार को भवन को जर्जर घोषित कर नया अस्पताल बनाने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। उन्होंने बताया कि पाई, जिला का सबसे बड़ा और प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा गांव है, इसलिए यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की सख्त जरूरत है, जिसे मुख्य सड़क पर बनाया जाना चाहिए।
19 केथल। पाई के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बाहर का दृश्य। संवाद
19 केथल। पाई के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बाहर का दृश्य। संवाद