संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले के करनाल-कैथल फोरलेन हाईवे पर भारी वाहनों का जमावड़ा गंभीर समस्या बन गया है। अक्सर सड़क किनारे भारी वाहन खड़े रहते हैं, जो दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। पुलिस की ओर से सख्ती बरती जा रही है, लेकिन बावजूद इसके इनकी संख्या में कमी नहीं आ रही। आने वाले दिनों में जब धुंध बढ़ेगी तब हादसों की आशंकाएं भी प्रबल हो जाएंगी।
इस 35 किलोमीटर लंबे फोरलेन पर रोजाना करीब 35 हजार छोटे-बड़े वाहन आवाजाही करते हैं। ओवरलोड वाहनों में धान से लदे ट्रक, भूसे और पराली से भरे ट्रैक्टर-ट्राली शामिल हैं, जो पूरे हाईवे को अवरुद्ध कर देते हैं। ये वाहन अक्सर फोरलेन के बीच या अवैध कट पर खड़े रहते हैं, जिससे अन्य वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा होता है। रात में ये वाहन दिखाई नहीं देते और हादसों का कारण बनते हैं।
लोगों का कहना है कि हाईवे की स्थिति और भी चिंताजनक है। टूटे डिवाइडर, उखड़े सांकेतिक बोर्ड, गायब सफेद पट्टी, गड्डे और अवैध कट लगातार सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। मौसम बिगड़ना शुरू हो चुका है। ठंड और कोहरा पड़ना शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में सुबह और रात में दृश्यता कम होती जाएगी, तब जरा सी लापरवाही किसी की जान पर संकट का कारण बन सकती है। लोगों का कहना है कि ऐसे में प्रशासन को इस संबंध में ध्यान देने की जरूरत है।
हादसों में इस साल अब तक 161 मौतें
जनवरी से नवंबर तक जिले के इस फोरलेन पर कुल 272 सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें 161 लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बढ़ते हादसों के बावजूद प्रशासन पूरी तरह नकेल नहीं कस पा रहा है। चालान की कार्रवाई की जाती है, लेकिन सड़क पर वाहनों की भीड़ कम नहीं हो रही।
विभाग की टीमें लगातार ओवरलोड वाहनों पर सख्ती बरत रही हैं। नियमों के खिलाफ सड़क पर खड़े वाहनों के चालान किए जा रहे हैं और भविष्य में भी यह कार्रवाई जारी रहेगी। -गुलाब सिंह, परिवहन विभाग के निरीक्षक
उठ रहे हैं सवाल
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रोड सेफ्टी नियमों की अनदेखी क्यों हो रही है?
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डीसी के आदेशों के बाद भी अधिकारी गंभीर क्यों नहीं हैं?
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फोरलेन की खामियों को दूर कराने में अफसर क्यों असफल?
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धुंध के मौसम से पहले सड़क सुरक्षा की सुध क्यों नहीं ली जा रही?
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लगातार हो रहे हादसों और मौतों के लिए जिम्मेदार कौन?