संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/कलायत। जिले में धान की फसल पर ‘बौने पौधे’ नामक खतरनाक वायरस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। इस वायरस से फसल की बढ़वार रुक जाती है, पत्तियां सूखने लगती हैं और पौधे असामान्य रूप से छोटे रह जाते हैं। इसे कृषि विज्ञान में राइस ब्लैक स्ट्रीक ड्वार्फ वायरस के नाम से जाना जाता है। यह संक्रमण सफेद तेला नामक कीट के माध्यम से एक पौधे से दूसरे में फैलता है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कैथल के उपनिदेशक डॉ. बाबू लाल और उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सतीश नारा के नेतृत्व में विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर खेतों का निरीक्षण कर रही हैं और किसानों को बीमारी के लक्षण, कारण और बचाव के उपायों को लेकर जागरूक कर रही हैं।
बिना सलाह के दवा प्रयोग न करें ः डॉ. नारा
डॉ. नारा ने किसानों से आग्रह किया कि वे किसी भी संदेह की स्थिति में निजी विक्रेताओं के कहने पर दवा का प्रयोग न करें, बल्कि सीधे कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करें, ताकि समय रहते फसल की रक्षा की जा सके।
बचाव के लिए उपाय
सफेद तेला की रोकथाम के लिए किसान चेस 120 ग्राम/एकड़ या ओशीन/टोकन 80 ग्राम/एकड़ दवा को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
संक्रमित पौधों को तुरंत उखाड़कर गड्ढे में दबा दें, ताकि बीमारी अन्य पौधों तक न फैले।
खेतों, नालियों और मेढ़ों की नियमित सफाई करें।
जलभराव न होने दें और उचित जल निकासी की व्यवस्था रखें।
वायरस के अनुकूल बन रहा मौसम
इन दिनों तापमान 28 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है और वातावरण में आद्र्रता बनी हुई है, जो इस वायरस के प्रसार के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर रही हैं।
विभाग की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे रोजाना सुबह-शाम खेतों का निरीक्षण करें और किसी भी लक्षण के दिखते ही विभाग से संपर्क करें। सतर्कता और समय पर उपचार से फसल को इस वायरस से बचाया जा सकता है।