कुलदीप प्रजापति
कैथल। अब परिवार पहचान पत्र अलग बनवाने का रास्ता बंद हो गया है। सरकार ने नए परिवार पहचान पत्र बनाने का विकल्प खत्म कर दिया है। अब कोई भी व्यक्ति अपनी पीपीपी अलग नहीं बनवा सकता। जिले में अब भी हजारों की संख्या में एकल परिवार ऐसे हैं, जिनके पास पीपीपी संयुक्त परिवार ही है। वह अलग परिवार पहचान पत्र बनवाने के लिए अधिकारियों और सीएससी के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनका कोई समाधान नहीं हो रहा और वह सरकारी सुविधाओं से भी वंचित रह रहे हैं।
गौरतलब है कि एक सप्ताह पहले तक पीपीपी वेबसाइट पर बिजली बिल के आधार अपनी अलग पीपीपी बनवाने का ऑप्शन आ रहा था लेकिन एक सप्ताह से यह ऑप्शन पीपीपी में आना बंद हो गया है। इससे लोगों को अपनी पीपीपी अलग बनवाने के लिए विभाग व सीएससी के धक्के खाने पड़ रहे हैं। ऑप्शन बंद करने का कारण बताया जा रहा है कि लोग बिजली मीटर के आधार पर दुरुपयोग करके बीपीएल कार्ड के लिए पीपीपी बनवाने लग गए थे। इस कारण से सरकार ने इसे बंद कर दिया है। हाल ही में किसी भी तरीके से परिवार पहचान पत्र नहीं बन सकता। जिन लोगों की अब तक पीपीपी नहीं बना हैं उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा और सरकारी योजनाओं से भी वंचित रहना पड़ेगा।
छह माह से दफ्तरों के काट रहा चक्कर नहीं बना पीपीपी : गांव नरड़ निवासी कुलदीप सिंह ने बताया कि वह छह माह से अपना परिवार पहचान पत्र बनवाने के लिए दफ्तरों व सीएससी के चक्कर काट रहा है। उसका परिवार पहचान पत्र अलग नहीं बन रहा। पहले उसका संयुक्त परिवार था। अब उसका एकल परिवार है। अब उसका सब कुछ अलग है। उसने अपना अलग से बिजली मीटर लगवाया है। लेकिन अब बताया जा रहा है सरकार ने परिवार पहचान पत्र बनाने का ऑप्शन ही खत्म कर दिया। उन्होंने कहा वह बहुत ही गरीब व्यक्ति है। मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है। उसे पीपीपी के बिना किसी भी सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। कुछ दिन पहले भारत विकसित यात्रा के दौरान भी उसने पीपीपी बनवाने का प्रयास किया। लेकिन उसमें भी अधिकारी अपनी खानापूर्ति करके चले गए। इसके अलावा उसे जो उनकी संयुक्त पीपीपी है उसमें भी आय अधिक है। जिसके चलते उसे डिपो से राशन नहीं मिल रहा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उसके पास सभी दस्तावेज हैं उनके आधार पर उसका पीपीपी बनाया जाए और जब तक उसका अलग नहीं बना संयुक्त राशन कार्ड पर उसे डिपो से राशन मिले। संवाद
बिना सर्वे कर बढ़ाई आय
नरेश कुमार ने बताया कि परिवार पहचान पत्र में आया कम करवाने के लिए संबंधित विभाग व सीएससी के कई बार चक्कर लगा चुका है, लेकिन उसकी आय कम नहीं हुई है। वह मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहा है। अधिकारियों ने बिना सर्वे करे ही उसकी आय बढ़ा दी है। आय के संबंध में उससे किसी प्रकार की पूछताछ नहीं की गई। पीपीपी में आय अधिक होने से उसे सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि उसकी आय सर्वे कर पीपीपी में ठीक की जाए।
नए पीपीपी बनाने के लिए सरकार ने विकल्प बंद कर दिया है। काफी लोग बीपीएल कार्ड बनवाने के लिए इसका दुरुपयोग कर पीपीपी बनवाने लगे थे। इस कारण आप्शन बंद किए गए हैं। जैसे ही इसमें विकल्प दोबारा आएगा, फिर से पीपीपी बनने लगेगी। फिलहाल इसमें मुख्यालय में टोल फ्री नंबर पर ही शिकायत दी जा सकती है। -सोमपाल, डीएम-परिवार पहचान पत्र