निशीकांत शर्मा
कलायत। गर्भवती महिलाओं के लिए सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा अब कलायत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में उपलब्ध हो गई है। इस अस्पताल से लगभग 42 गांव जुड़े हुए हैं। पहले यहां ऐसी कोई सुविधा न होने के कारण सिजेरियन प्रसव के लिए मरीजों को कैथल जाना पड़ता था।
प्रवर चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव मित्तल ने बताया कि यह सुविधा फिलहाल केवल उन्हीं गर्भवती महिलाओं के लिए रहेगी जिनका ऑपरेशन से प्रसव पहले से ही निर्धारित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपातकालीन सिजेरियन प्रसव के लिए यहां व्यवस्था नहीं है। इमरजेंसी की स्थिति में मरीजों को जिला नागरिक अस्पताल ही रेफर किया जाएगा।
डॉ. मित्तल ने कहा कि निर्धारित ऑपरेशन के लिए अस्पताल में आधारभूत ढांचा और सर्जन पहले से तय किए जाएंगे। सीएचसी में ऑपरेशन थियेटर की शुरुआत तो हो गई है, लेकिन नियमित सर्जन की नियुक्ति अभी नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल में कंप्लीट ब्लड काउंट मशीन (सीबीसी) भी स्थापित की गई है, जिससे मरीजों के रक्त से संबंधित सभी प्रकार की जांचें यहीं पर की जा सकेंगी। इससे मरीजों को निजी लैब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जहां एक बार की जांच पर 200 से 300 रुपये तक का खर्च आता था। अब अस्पताल में आरबीसी, प्लेटलेट काउंट, पीसीवी, एमसीएचसी सहित अन्य रक्त जांचें भी करवाई जा रही हैं। संवाद
चिकित्सकों की भारी कमी बनी चुनौती
कलायत नागरिक अस्पताल उपमंडल स्तर का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए आते हैं। अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 13 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 2 एसएमओ और 11 एमओ होने चाहिए। फिलहाल यहां सिर्फ 1 एसएमओ और 2 एमओ ही कार्यरत हैं। शेष 10 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। केवल तीन चिकित्सकों के सहारे यह उपमंडलीय अस्पताल संचालित हो रहा है। इसके अलावा, बालू, बात्ता और बड़सीकरी के प्ाथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में कोई भी चिकित्सक नियुक्त नहीं है। देबण और सजूमा पीएचसी में एक-एक एमओ तैनात हैं।