ढांड। ढांड कस्बे में एक ही कैंपस में संचालित तीन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 1169 विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ रहा है। राजकीय प्राथमिक पाठशाला, राजकीय कन्या उच्च विद्यालय और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। कहीं शिक्षकों की कमी है तो कहीं जर्जर घोषित कमरों में पढ़ाई का संकट है। वहीं तीनों स्कूलों में खेल मैदान नहीं होने के कारण बच्चे खेल गतिविधियों से भी वंचित हैं।
प्राथमिक पाठशाला में 400 बच्चों पर नौ शिक्षक
राजकीय प्राथमिक पाठशाला ढांड में करीब 400 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार करीब 22 शिक्षकों की आवश्यकता है लेकिन वर्तमान में केवल नौ शिक्षक ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इनमें सिर्फ तीन नियमित शिक्षक हैं, जबकि छह शिक्षक दूसरे स्कूलों से डेपुटेशन पर लगाए गए हैं। स्कूल प्रबंधन की ओर से बच्चों को नियमित और बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए विभाग के पास 10 अतिरिक्त शिक्षकों की मांग भेजी गई है। शिक्षकों की कमी का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
जर्जर शौचालयों का इस्तेमाल करने को मजबूर
प्राथमिक पाठशाला में बच्चों के लिए बनाए गए शौचालय काफी समय पहले जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। इसके बावजूद अभी तक उनके स्थान पर नए शौचालयों की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में बच्चों को मजबूरी में पुराने और जर्जर घोषित शौचालयों का ही इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इनकी नियमित साफ-सफाई भी नहीं हो रही है। स्कूल में 400 विद्यार्थियों के बावजूद स्वीपर, माली, चौकीदार और क्लर्क का पद भी उपलब्ध नहीं है। इससे स्कूल की व्यवस्थाओं का अतिरिक्त बोझ शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन पर पड़ रहा है।
कन्या विद्यालय में 275 छात्राओं के लिए सिर्फ तीन कमरे
राजकीय कन्या उच्च विद्यालय में भी हालात चिंताजनक हैं। यहां कक्षा छठी से 10वीं तक करीब 275 छात्राएं पढ़ रही हैं। छात्राओं की कक्षाओं के लिए करीब 12 कमरों की आवश्यकता है लेकिन वर्तमान में महज तीन कमरों में ही पढ़ाई संचालित की जा रही है। स्कूल के छह कमरे हाल ही में जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। वहीं दो नए कमरों के निर्माण की मंजूरी भी मिल चुकी है लेकिन विभागीय स्तर पर देरी के कारण इनका निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
शिक्षकों और शौचालयों की भी कमी
कन्या विद्यालय में छात्राओं के लिए बनाए गए शौचालयों में साफ-सफाई की व्यवस्था तो है लेकिन विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शौचालय पर्याप्त नहीं हैं। इसके अलावा स्कूल में मुख्य अध्यापक का पद भी रिक्त है। ड्राइंग विषय के शिक्षक की कमी के कारण करीब 190 छात्राओं को इस विषय की पढ़ाई स्वयं के स्तर पर करनी पड़ रही है। इससे छात्राओं की विषयवार शिक्षा प्रभावित हो रही है।
विद्यालय में प्राचार्य का पद खाली
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छठी से 12वीं तक 494 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार कक्षाओं के लिए कमरे पर्याप्त बताए जा रहे हैं लेकिन शौचालयों की संख्या कम है। विद्यालय में प्राचार्य का पद खाली होने के कारण प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। अभिभावकों और विद्यार्थियों की मांग है कि स्कूल में जल्द से जल्द नियमित प्राचार्य की नियुक्ति की जाए।
15 साल से खेल मैदान के लिए तरस रहे 1169 विद्यार्थी
तीनों स्कूलों की सबसे बड़ी समस्या खेल मैदान का अभाव है। एक ही कैंपस में संचालित इन तीनों विद्यालयों में कुल 1169 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं लेकिन उनके लिए खेल का मैदान उपलब्ध नहीं है। इसके कारण विद्यार्थी खेल गतिविधियों में नियमित रूप से भाग नहीं ले पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार आसपास के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर तक प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं ढांड के इन तीनों सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी पिछले करीब 15 वर्षों से खेल प्रतियोगिताओं से दूर हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार का कहना है कि इसकी जांच करवाएंगे। अगर कोई समस्या है तो उसका समाधान करवाया जाएगा।
राजकीय प्राथमिक पाठशाला ढांड के कंडम घोषित शौचालय।
राजकीय प्राथमिक पाठशाला ढांड के कंडम घोषित शौचालय।
राजकीय प्राथमिक पाठशाला ढांड के कंडम घोषित शौचालय।