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जिला अस्पताल में ऑनलाइन कामकाज ठप

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जिला अस्पताल में सोमवार को ऑनलाइन सेवाओं के ठप होने से हाहाकार मचा रहा। लोगों को पर्च कटवाने सहित इलाज करवाने तक में कई कई घंटों का इंतजार करना पड़ा। कारण था कि यहां ऑनलाइन सेवाओं के लिए ई उपचार सेवा लंबे समय से ठप पड़ी है। इससे अस्पताल में गायनी वार्ड, रक्त ओपीडी, एक्स-रे रूम, ऑपरेशन थियेटर कक्ष, एमरजेंसी वार्ड में ऑनलाइन कामकाज पूरी तरह से बंद हो रहा है। इससे मरीजों को पूरा-पूरा दिन इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
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यहां तैनात कर्मचारी सर्वर डाउन का हवाला दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यहां लगाई गई बैटरी खराब है। जिम्मेदार लोगों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। एक्स-रे वार्ड में नहीं आ रही फिल्म-अस्पताल में बने एक्स-रे वार्ड में ऑनलाइन सर्वर बंद होने से यहां काफी काम प्रभावित हो रहा है। सामान्य दिनों से जहां 70-80 मरीजों के एक्स-रे होते हैं। अब यहां जैसे तैसे काम चलाया जा रहा है। पहले यहां कंप्यूटर में मरीज की तस्वीर भी खींची जाती थी। लेकिन अब मरीजों को खुद के मोबाइल लेकर पहुंचना पड़ रहा है। यहां तैनात कर्मचारी ने बताया एक्स-रे में फिल्म का अहम रोल रहता है। लेकिन पिछले एक सप्ताह से बंद है। मरीजों के साथ-साथ उन्हें भी काफी दिक्कतें हो रही है।
मरीजों को इलाज के लिए सबसे पहले पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। इसके बाद ही आगामी प्रक्रिया शुरू होती है। लेकिन यहां कंप्यूटर की कर्मचारियों द्वारा हाथ से पर्चियां बनाई जा रही हैं। पहले जिस कार्य के लिए 5-6 मिनट का समय लगता था। अब यहां मरीजों को कई-कई घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। ज्यादा दिक्कत इमरजेंसी व गर्भवती महिलाओं को हो र ी है। रोजाना जहां 1800-2000 तक पंजीकरण किया जाता है। अब आधे से ज्यादा काम प्रभावित हुआ है। मरीज इंतजार के बाद मायूस होकर वापस लौट रहे हैं।
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अस्पताल परिसर में बने ब्लड बैंक में मरीजों का ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो रहा है। इससे जरूरतमंद मरीजों को रक्त के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। इससे पहले मरीज को कम समय में ब्लड मिल जाता था। अब इसके लिए मरीजों के लिए दो से तीन दिन तक इंतजार करना पड़ता है।
डिस्पेंसरी कक्ष में भी कंप्यूटर बंद होने से काफी काम प्रभावित हो रहा है। यहां मरीजों के डिस्टेल का भी सही से मिलान नहीं हो पा रहा। यहां के कर्मचारी ने बताया कि एक कागज को कई-कई बार हाथों से निकालना पड़ रहा है। इससे मरीजों को भी परेशानी होती है। पहले क्यू आर कोड से पूरी डिटेल्स आ जाती थी। लेकिन अब रजिस्टर में नोट करना पड़ रहा है। इसमें समय भी ज्यादा लगता है।
सोमवार को धीमी गति से कार्य होने के कारण अस्पताल में मरीजों की लंबी
लंबी कतारें लगी रही। सामान्य दिनों में जहां एक डॉक्टर लगभग 250 ओपीडी करते हैं। सोमवार को यह 100-120 के आस-पास रही।
कान के इलाज के लिए पहुंची महिला कमलेश ने बताया कि वे कान के इलाज के लिए जिला अस्पताल में पहुंची थी। यहां कई घंटे बाद पर्ची कटी। इसके बाद डॉक्टर नहीं मिले। इससे उन्हें काफी परेशानी हुई।
मरीज विक्रम ने बताया कि उनको तीन-चार दिन पहले बाइक पर चोट लगी थी। जिससे उनकी पांव की हड्डी में फ्रेक्चर हुआ। इसके लिए वे ऑपरेशन करवाने के लिए अस्पताल पहुंचे। यहां सर्वर डाउन बताया गया।
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