फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: अवैध रूप से भारत में घूमते हुए हेराफेरी करने में विदेश दंपती दोषी, एक साल की कारावास

Fri, 05 May 2023 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
नसीब सैनी
विज्ञापन




कैथल। अवैध वीजा पर भारत में घूम रहे ईरानी दंपती को न्यायालय ने विदेशियों विषयक अधिनियम और खल व्यापारी से हेराफेरी मामले में एक साल के कारावास तथा एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर दोनों को एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। कारावास पूरा होने पर दोनों को ईरान डिपोर्ट करने का भी आदेश जारी किया गया है।



घटनाक्रम के अनुसार, 17 नवंबर 2022 को कैथल निवासी महेंद्रपाल जींद रोड पर अपनी खल की दुकान पर बैठा था, जहां दो विदेशी आए। पहले उन्होंने उससे दो किलो बिनौला खल लिया और उसका भुगतान कर दिया। इस दौरान दुकानदार के पास दो हजार के नोटों की गड्ढी देखकर उन्होंने देखने के बहाने उसे ले लिया और फिर चालाकी से 34 नोट गायब कर दिए। जब दुकानदार को ठगी का अहसास हुआ तो उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सूचना मिलने के बाद अंबाला के नाराणगढ़ से दोनों विदेशियों को काबू कर लिया। उनकी पहचान ईरान के तेहरान के निकट खलखल निवासी अली हाशेमी बोफराजोर्ड व उसकी पत्नी अफशाह मोराडवांड के रूप में हुई थी। दोनों के पास से नकदी बरामद कर ली गई। उस समय कोरोना पॉजिटिव होने के कारण दोनों को क्वारंटीन भी किया गया था। मामला तभी से न्यायालय में विचाराधीन था। सोमवार को सुनवाई में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मान्विका यादव ने अभियोजन पक्ष की बात को सही माना। सीसीटीवी फुटेज से दोनों के दुकान के बाहर पहुंचने की पुष्टि हुई। न्यायालय के सामने यह तथ्य भी आया कि दोनों के वीजा की अवधि भी समाप्त हो चुकी थी। अवैध रूप से भारत में घूमते हुए उन्होंने उक्त अपराध किया। न्यायालय ने दोनों को चोरी के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 379, 34 में छह माह की कैद, हेराफेरी में धारा 411 के तहत छह माह की कैद व विदेशियों विषयक अधिनियम 1946 की धारा 14 के तहत एक साल के कारावास व एक-एक हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर एक माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भी सुनाई है। न्यायालय ने इनकी सजा अवधि पूरी होने पर और कोई अन्य मामला लंबित न होने पर इन्हें ईरान डिपोर्ट करने का भी आदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन




कोर्ट ने कहा-रहम के काबिल नहीं दोषी



न्यायालय ने 26 अप्रैल को दोनों को दोषी करार दिया था। सोमवार दो मई को फैसला सुनाए जाने के दौरान ईरानी दंपती ने न्यायालय से रहम की अपील की। दोनों ने कहा कि ईरान में उनके छह से 18 आयु वर्ग में चार बच्चे हैं व पिता की उम्र 80 साल है, जिनकी उन्हें देखभाल करनी है। इस पर न्यायालय ने कहा कि जो अपराध दोनों ने किया है, उसे देखते हुए वे रहम के काबिल नहीं हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें