कैथल। लगातार बीते तीन साल से नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान बनते आ रहे सुरेश मित्तल को बुधवार को पुरानी अनाज मंडी में भी सर्वसम्मति से प्रधान चुन लिया गया।
वर्ष 1980 में बनी नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के गठन के बाद 34 सालों में यह पहला अवसर है जब दोनों ही अनाज मंडियों ने एक आढ़ती को सर्वसम्मति से अपना अध्यक्ष चुना है। मित्तल अब लगभग नई अनाज मंडी के 800 एवं पुरानी अनाज मंडी के 300 के लगभग कच्चे एवं पक्का आढ़तियों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
मित्तल इससे पहले पिछले सप्ताह ही नई अनाज मंडी में लगातार तीसरी बार प्रधान चुने गए थे। उन्हें नई मंडी में सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया था। उनके पुरानी अनाज मंडी में भी अध्यक्ष बनने के कयास लगाए जा रहे थे। इन्हीं कयासों के बीच मंगलवार को पुरानी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन की बैठक हुई।
जिसमें निवर्तमान अध्यक्ष जोगध्यान गोयल ने पिछले वर्ष का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया और साथ ही चुनाव को लेकर विचार-विमर्श हुआ। शुरू में सुमित किठानिया एवं सुरेश मित्तल का नाम अध्यक्ष के लिए सामने आया। लेकिन बाद में सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुनने का निर्णय लिया गया।
इसके बाद बुधवार को सभी आढ़तियों ने सुरेश मित्तल को पुरानी अनाज मंडी में भी सर्वम्मति से अध्यक्ष चुन लिया। मौके पर विनोद कुमार, राधेश्याम पाड़ला, गुलाब सिंह, पवन कुमार, श्याम बहादुर खुरानिया, रामभज मित्तल, बीरभान जैन, राजपाल चहल, सुमित किठानिया, सुभाष, जोगध्यान गोयल, गुलाब सिंह, संजीव कुमार, राजकुमार गर्ग, सतीश क्योड़क, लाजपतराय सिंगला सहित अन्य आढ़ती मौजूद थे।
आढ़ती बीरभान जैन ने बताया कि नई एवं पुरानी अनाज मंडी के लिए एक ही आढ़ती को 34 साल बाद सर्वसम्मति से प्रधान चुना गया है। वर्ष 1980 में नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन का गठन हुआ था और ऐसा पहली बार हुआ कि दोनों मंडियों ने एक ही व्यक्ति को प्रधान चुना। इससे पहले दोनों ही मंडियों के लिए अलग-अलग आढ़तियों को प्रधान चुना जाता है। लेकिन इस बार दोनों ही अनाज मंडियों में सर्वसम्मति से चुनाव हुए और आढ़ती सुरेश मित्तल को दोनों का प्रधान चुना गया। नई अनाज मंडी में मित्तल द्वारा आढ़तियों, किसानों एवं मजदूरों के लिए किए गए कार्यों के देखते हुए कच्चे एवं पक्के लगभग 1000 से अधिक आढ़तियों ने उनमें विश्वास जताया है।
आढ़तियों की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगा : मित्तल
नवनियुक्त प्रधान सुरेश मित्तल ने कहा कि आढ़तियों ने जो सम्मान उन्हें बख्शा है, वे इसके लिए उनके आभारी हैं। वे आढ़तियों की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। सीजन में पिछले सालोें की तरह से आढ़तियों, किसानों एवं मजदूरों के हितों के लिए प्रशासनिक अधिकारियों एवं खरीद एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जाएगा। सीजन में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
प्रदेश की सबसे पुरानी मंडियों में से एक
विदित रहे कि कैथल नई एवं पुरानी अनाज मंडी हरियाणा की पुरानी अनाज मंडियों में से एक हैं। पुरानी अनाज मंडी का गठन वर्ष 1897 में किया गया था। वहीं, आज भी दोनों मंडियां प्रदेश के खाद्यान्न में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। एक लाख से अधिक की आबादी मंडियों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं तो आर्थिक, राजनीतिक एवं सामाजिक स्थिति पर मंडी के रुख का अप्रत्यक्ष रूप से असर रहता है।