20-गुहला चीका। श्रीराम वनवास की कथा का प्रसंग सुनाते कथावाचक। संस्थान
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गुहला-चीका। सिनेमा रोड स्थित विश्वकर्मा मंदिर चीका में नौ दिवसीय श्री राम कथा के आठवें दिन प्रयागराज से पहुंचे कथावाचक नारायण प्रसाद द्विवेदी ने श्रीराम वनवास की कथा का प्रसंग सुनाया। जैसे ही राम वनगमन की कथा शुरु हुई तो श्रोताओं की आंखों से आंसू छलक पड़े। वहीं, कथावाचक ने भरत संवाद व लंका दहन का भी वर्णन सुनाया।
कथावाचक नारायण प्रसाद द्विवेदी ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि अयोध्या के कोप भवन में कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वचन मांगे। जिस पर राजा दशरथ ने कहा कि रघुकुल रीति सदा चल आई, प्राण जाई पर वचन न जाई… यह सुनते ही कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वचनों में से पहला वचन अपने पुत्र भरत को अयोध्या की राजगद्दी मांग ली तथा दूसरा भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मांगा।
कैकेयी के यह कटु वचन सुनते ही महाराजा दशरथ के होश उड़ गए। वहीं जब भगवान श्रीराम को इस बात का पता चला तो वह पिता के वचन को निभाने के लिए वन जाने को खुशी-खुशी तैयार हो गए। भगवान श्रीराम के वन जाने की बात सुनते ही माता सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने को तैयार हो गए। राम जी के मना करने के बाद भी लक्ष्मण नहीं माने। जिसके बाद तीनों अयोध्या से वन के लिए निकल पड़े।