कानों पर ज्वारे रखकर उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती बहन। संवाद
गुहला-चीका। दशहरे पर भाई-बहन के प्रेम से जुड़ी एक विशेष लोक परंपरा निभाई गई। दशहरे के दिन बहनों ने अपने भाइयों के कानों पर ज्वारे (जौ के अंकुर) रखकर उनकी सुख-समृद्धि, खुशहाली और दीर्घायु की कामना की। इस परंपरा के माध्यम से भाई-बहन के अटूट प्रेम और पारिवारिक रिश्तों की मिठास भी झलकती है। परंपरा के अनुसार दशहरे के दिन बहनें भाइयों के कानों पर ज्वारे रखती हैं और परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस रस्म को उत्साह के साथ निभाया जाता है। इस अवसर पर घरों में त्योहार का माहौल रहता है। बहनें भाइयों के सुखी जीवन की कामना करती हैं, वहीं भाई भी अपनी बहनों के प्रति स्नेह व्यक्त करते हैं।
पीढ़ी दर पीढ़ी कायम है परंपरा
आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीण क्षेत्रों में इस परंपरा का महत्व बना हुआ है। बुजुर्ग महिलाएं नई पीढ़ी को इस रस्म के बारे में बताती हैं जिससे लोक संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से उनका जुड़ाव बना रहे।
कानों पर ज्वारे रखकर उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती बहन। संवाद