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ओलंपिक : तैराकी में हरियाणवी आखिर कब गाड़ेंगे झंडे

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डॉ. श्याम सिंह
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करनाल। हरियाणा को खिलाड़ियों का प्रदेश यूं ही नहीं कहा जाता क्योंकि भारत में खेलों का जब भी जिक्र होता है तो सबसे पहले म्हारे हरियाणा का नाम आता है। प्रतियोगिताएं चाहे राष्ट्रीय हो या अंतरराष्ट्रीय, म्हारे हरियाणा की पदकों के मामलों में भागीदारी जबरस्त रहती है।

अबकी पेरिस ओलंपिक में जाने वाले भारतीय दल की ही बात करें तो कुल 118 खिलाड़ियों में से 24 खिलाड़ी म्हारे राज्य से ही हैं। हमारे खिलाड़ी कुश्ती, मुक्केबाजी, शूटिंग के साथ तैराकी में भी झंडे गाड़ रहे हैं लेकिन यह अफसोस की बात है कि तैराकी के लिए ओलंपिक जाने वाले खिलाड़ियों में यहां का कोई भी तैराक शामिल नहीं है।
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इस बार भारतीय दल में शामिल दोनों तैराक कर्नाटक के हैं। इनमें धीनिधि देसिंघु सबसे कम उम्र की ओलंपिक दल की सदस्य हैं। उनके अलावा श्रीहरि नटराज ने यूनिवर्सलिटी कोटा के जरिये 2024 पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। गौरतलब है कि यूनिवर्सलिटी कोटा का उद्देश्य पारंपरिक रूप से छोटे प्रतिनिधिमंडल वाले देशों के एथलीटों को अवसर प्रदान करके ओलंपिक में खेलों की विविधता को बढ़ाना है। ये कोटा स्थान ओलंपिक खेल त्रिपक्षीय आयोग द्वारा पात्र राष्ट्रीय ओलंपिक समितियों को आवंटित किए जाते हैं। इस कोटे के तहत किसी देश के एक पुरुष और एक महिला तैराक को ओलंपिक में हिस्सा लेने का मौका मिलता है।

पेरिस ओलंपिक में इस बार भारतीय दल का नेतृत्व म्हारा गोल्डन बॉय नीरज चोपड़ा करेगा लेकिन यदि तैराकों में हरियाणवी शामिल होता तो पदकों की उम्मीद भी बढ़ जाती। दरअसल, म्हारे खिलाड़ियों की कद-काठी तैराकी के लिहाज से बेहतरीन मानी जाती है। हाल के दशक में म्हारी छोरे और छोरियों ने तैराकी में झंडे भी गाड़े हैं। और तो और सरकार भी लगातार प्रयास कर रही है कि यहां से बेहतरीन तैराक निकले लेकिन अफसोस की बात है कि इसके बावजूद तैराकी में गुरुग्राम की शिवानी कटारिया के बाद कोई बड़ा नाम अभी तक उभरा नहीं सका है। वर्ष 2016 में वह भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली महिला तैराक बनी थीं लेकिन 200 मीटर फ्रीस्टाइल में उनका 2:09.30 का समय उन्हें सेमीफाइनल के लिए योग्य नहीं बना सका था।

तैराकी के प्रशिक्षकों से बातचीत की तो पता चला कि इसका प्रमुख कारण ऑल वेदर पूल का न होना है। दरअसल, हरियाणा में ठंड के महीनों में पांच महीने तैराकी बंद कर दी जाती है। यदि खिलाड़ियों को तैराकी का अभ्यास करना है तो उन्हें बाहर यानी बेंगलुरू या दिल्ली आदि जाना पड़ता है। ऐसे में उनका समय और रुपया दोनों खर्च होता है। तैराकी में ठंड के समय अभ्यास करना काफी मुश्किल भरा होता है क्योंकि पहले हरियाणा में ऑल वेदर पूल उपलब्ध नहीं थे। हालांकि अब हालात बदल रहे हैं। अंबाला में खिलाड़ियों को यह सुविधा मिल गई है और जल्द ही करनाल और कुरुक्षेत्र में भी ऑल वेदर पूल खोलने की तैयारी है। यह सुविधा मिलने के बाद ठंड के महीनों में तैराको को प्रैक्टिस करना आसान हो जाएगा।
तैराकी कोच बोले...
करनाल में जल्द ही ऑल वेदर पूल
करनाल में जल्द ही ऑल वेदर पूल बन जाएगा तो खिलाड़ियों को वर्ष भर अभ्यास की सुविधा मिल सकेगी। नतीजा, आगे तैराकी स्पर्धाओं में दिखेगा। तब हरियाणवी खिलाडि़यों को ज्यादा सफलता मिलेगी, यह निश्चित है।

-कंवलजीत संधू, तैराकी कोच- कर्ण ताल, कर्ण स्टेडियम, करनाल
बेहतर सुविधाओं की दरकार
ओलंपिक में दो तरह की क्वालिफिकेशन होती है। ए और बी। ए मानक समय के अनुसार और बी कैटेगरी कोटा से चयन है। हरियाणा के खिलाड़ियों को यदि बेहतर सुविधाएं मिलें तो वे न सिर्फ ओलंपिक में क्वालीफाई कर सकते हैं, बल्कि पदक भी जीतने का दम रखते हैं। -राम सिंह, तैराकी कोच, अंबाला
तैराकी में ब्रेक होना अच्छा नहीं होता
कोई खिलाड़ी जब तैराकी सीखता है तो ब्रेक नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे उसका रुझान बदल जाता है। दरअसल, जब वह दूसरेे खेलों में हाथ आजमाता है तो कई बार वह तैराकी को छोड़कर उसी दिशा में आगे बढ़ जाता है। -सुनील कुमार, कोच- मेजर नितिन बाली स्वीमिंग पूल, कुरुक्षेत्र
पांच महीने बंद हो जाती है तैराकी
कर्नाटक में खिलाड़ियों को पूरा साल अभ्यास करने को मिलता है और हमारे यहां वर्ष के पांच महीने तैराकी बंद हो जाती है। अभ्यास के लिए फिर से शून्य से ही शुरुअात करनी पड़ती है, नतीजा खिलाड़ी पिछड़ जाता है। -अजय कुमार, तैराकी कोच, कैथल

सबसे ज्यादा पदक तैराकी में माइकल फेल्प्स ने जीते
ओलंपिक खेलों में व्यकि्तगत स्पर्धाओं में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले खिलाड़ी अमेरिका के माइकल फेल्प्स हैं, जिन्होंने तैराकी में कुल 28 पदक जीते हैं। इनमें 23 स्वर्ण के साथ तीन रजत और दो कांस्य पदक शामिल हैं। उनके लंबे कद को उनकी सफलता में सहायक बताया जाता है और जहां तक हरियाणा के खिलाड़ियों की बात करें तो यहां म्हारे छोरे भी कद-काठी में उन्हें टक्कर देते हैं। इसके बावजूद तैराकी में उन्हें सफलता क्यों नहीं मिलती, यह सोचनीय है।

पहले पुराने रिकॉर्ड की बात करें तो भारत के तैराकों में ओलंपिक में क्वालीफाई करने में सबसे पहले केरल के साजन प्रकाश ने सफलता हासिल की थी। इटली के रोम में सेटे कोली ट्रॉफी में ओलंपिक के लिए पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा में 'ए' योग्यता अंक हासिल करने वाले वह पहले भारतीय तैराक बने थे। योग्यता मानक 1:56.48 सेकेंड था और उन्होंने 1:56:38 सेंकेंड का समय लिया। इस उपलब्धि के एक दिन बाद उनके साथी श्रीहरि नटराज ने भी 100 मीटर बैकस्ट्रोक में 'ए' मार्क हासिल किया। मानक समय 53.85 सेकंड था और उन्होंने 53.77 सेकंड का समय लिया। हालांकि दोनों टोक्यो ओलंपिक में पदक जीतने में असफल रहे। परिणाम के अनुसार, साजन प्रकाश 46वें और श्रीहरी नटराज 27वें स्थान पर रहे। उनके साथ गईं माना पटेल का स्थान 39वां रहा।

माना को भी यूनिवर्सलिटी कोटा के जरिए ओलंपिक में प्रवेश मिला था। साजन की लंबाई पांच फुट 10 इंच है और उन्होंने अपनी असफलता के लिए अपनी लंबाई पर को भी जिम्मेदार ठहराया था। ऐसे में सवाल उठता है कि बेहतरीन कद-काठी वाले हरियाणवी क्या मेहनत करके क्या अगले ओलंपिक में कुछ कमाल नहीं दिखा सकते हैं? विभिन्न कोचों की माने तो तैराकी में सफलता केे लिए पूरे साल प्रैक्टिस की जरूरत खिलाड़ियों को पड़ती है, जो ऑल वेदर पूल न होने की वजह से संभव नहीं है। पहले के मुकाबले खेलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर काफी मजबूत हुआ है लेकिन तैराकी के क्षेत्र में और ध्यान दिए जाने की जरूरत है।
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ओलंपिक खेलों में म्हारा हरियाणा
ओलंपिक खेलों में अब तक भारत ने कुल मिलकर 35 पदक जीते हैं, इनमें सबसे ज्यादा 12 भारतीय हॉकी टीम ने जीते हैं। इनमें से छह लगातार ओलंपिक स्वर्ण पदक के साथ कुल आठ स्वर्ण पदक शामिल हैं। इनके अलावा एक रजत और तीन कांस्य पदक भारतीय टीम के खाते मेें जमा हैं। शेष बचे 23 मेडल भारतीय खिलाड़ियों ने एकल इवेंट में जीते हैं। इनमें सात पदक हरियाणा के खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम है।
ओलंपिक में पदक विजेता हरियाणवी खिलाड़ी
वर्ष
ओलंपिक खिलाड़ी निवासी
खेल
पदक

2008
बीजिंग
विजेंद्र सिंह
भिवानी
मुक्केबाजी
कांस्य

2012
लंदन
योगेश्वर दत्त
सोनीपत
कुश्ती
कांस्य

2012
लंदन
साइना नेहवाल
हिसार
बैडमिंटन
कांस्य

2016
रियो
साक्षी मलिक
रोहतक
कुश्ती
कांस्य

2020
टोक्यो
नीरज चोपड़ा पानीपत जैवलिन स्वर्ण

2020
टोक्यो
रवि दहिया
सोनीपत
कुश्ती
रजत

2020
टोक्यो
बजरंग पूनिया
झज्जर
कुश्ती
कांस्य
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