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Kaithal News: बगैर सरकारी लिखा-पढ़ी के खरीदे जा रहे पुराने वाहन

Fri, 14 Nov 2025 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिले की सड़कों पर करीब 30-40 प्रतिशत पुराने वाहन अभी भी पुराने मालिक के नाम पर फर्राटा भर रहे हैं। वाहन एजेंट पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त करते समय मौके पर केवल 10-20 रुपये का स्टांप भरते हैं और वाहन का नाम नए मालिक के स्थान पर टाइप कर देते हैं। हालांकि, आरसी तब तक ट्रांसफर नहीं होती जब तक परिवहन विभाग (आरटीए) के रिकार्ड में बदलाव न हो।

स्टीयरिंग पर नए शख्स होने का परिणाम यह है कि यदि वाहन का गलत इस्तेमाल होता है तो

जवाबदेही पुराने मालिक के नाम पर बनती है। आरटीए विभाग के अनुसार, शहर में 72 फर्म को ट्रेड लाइसेंस जारी किए गए हैं, जो केवल नए वाहनों की बिक्री कर सकते हैं। पुराने वाहन खरीदने-बेचने वालों का कोई रिकॉर्ड विभाग के पास नहीं होता। आरटीए गिरीश चावला ने बताया कि वाहन तब ही विभाग के रिकार्ड में आता है जब ट्रांसफर के लिए आवेदन किया जाए।
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ट्रांसफर किए बिना वाहन बेचना जोखिम भरा ः जब आप अपनी पुरानी गाड़ी बेचने या स्क्रैप करते समय कानूनी और दस्तावेजी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक है। एक छोटी सी लापरवाही परेशानी बन सकती है- जैसे चालान, दुर्घटना या किसी अवैध गतिविधि का बोझ गिर सकता है। इसलिए गाड़ी ट्रांसफर करने से पहले आरसी अपडेट, इंश्योरेंस ट्रांसफर, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) और स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट जैसी औपचारिकताओं को सही तरीके से पूरा करना जरूरी है।

दरअसल, गाड़ी बेचते समय तय समय में ही आरसी ट्रांसफर न कराना जोखिम भरा हो सकता है। पंजीकृत मालिक होने के नाते, आप गाड़ी के लिए कानूनी रूप से तब तक जिम्मेदार रहते हैं, जब तक कि ऑनरशिप आधिकारिक रूप से ट्रांसफर न हो जाए। अगर कार या कोई भी वाहन किसी दुर्घटना, अपराध या यातायात उल्लंघन में शामिल होती है, तो अधिकारी उसे आप तक पहुंचा देंगे। बिक्री की एक शर्त के रूप में ऑनरशिप के तत्काल ट्रांसफर पर जोर दें।
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रोजाना 30-35 पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त

कैथल में रोजाना 30-35 पुराने वाहनों की खरीद-फरोख्त होती है, जिसमें मुख्य रूप से कार शामिल हैं। शहर में हर रविवार को पेहोवा चौक और एसबीआई रोड पर कार मार्केट लगती है। यहां वाहनों की खरीद-फरोख्त स्टांप या एफिडेविट के आधार पर होती है और बाद में आरसी ट्रांसफर की जाती है। कई बार इसमें कोताही बरती जाती है और महीनों लग जाते हैं। इसके अलावा, ओएलएक्स जैसे प्लेटफार्म पर भी रोजाना हजारों वाहन खरीदे-बेचे जाते हैं।
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