संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत नगर पालिका में हाउस बैठक के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का मामला अब शहरी स्थानीय निकाय विभाग के जिला स्तर पर बैठे अधिकारियों के लिए गंभीर सिरदर्द बन गया है। डीसी प्रीति को दी गई पार्षदों की शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
इस संबंध में कैथल मुख्यालय में जिला नगर आयुक्त कपिल कुमार के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई हुई। पार्षदों की टीम ने नौ पार्षदों की बैठक में गैर-मौजूदगी के प्रमाण पेश किए और एक पार्षद ने अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को नगर पालिका की बैठक निर्धारित समय यानी सुबह के बजाय शाम के समय हुई, जो नगर पालिका नियमों के खिलाफ है।
नाराज पार्षदों का आरोप है कि बैठक में विकास कार्यों की कार्यवाही का झांसा देकर गुमराहपूर्वक हस्ताक्षर करवाए गए, और इसलिए उनके हस्ताक्षर रद्द किए जाएं। साथ ही, उन्होंने बैठक की वैधता पर सवाल उठाते हुए नगर पालिका के मूल रिकार्ड की पूरी जांच की मांग की।
पार्षदों का कहना है कि नगर पालिका जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में इस प्रकार की कार्यशैली पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है, क्योंकि प्रदेश सरकार और शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय पहले ही हाउस बैठकों की वीडियो और फोटोग्राफी के आदेश दे चुके हैं।
26 सितंबर की बैठक की फोटो और वीडियो उपलब्ध नहीं हैं, जिससे अधिकारियों की पारदर्शिता पर संदेह पैदा होता है। पार्षदों ने करीब एक करोड़ रुपये के बजट से बिना आवश्यकता के किए जा रहे सामान की खरीददारी पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो महानिदेशक को शिकायत भेजकर सरकार को चूना लगाने के मामले की जांच की मांग की है।
शिकायत के आधार पर कलायत नगर पालिका प्रोसिडिंग बुक से जुड़े मामले की जांच की जा रही है। इसमें शिकायतकर्ता पार्षद और नगर पालिका अधिकारियों को भी जांच के लिए मुख्यालय बुलाया गया है। -कपिल कुमार, जिला नगर आयुक्त