कलायत। मटौर गांव स्थित श्री तीर्थ पर वार्षिक मेले उपलक्ष्य में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या मेंं श्रद्धालु पहुंचे। वार्षिक पर्व की शुरूआत धार्मिक स्थल के महंत सुमेर दास की अगुवाई मेंं संत-महंतों और श्रद्धालुओं ने हवन मेंं आहुतियां डालकर की। हवन के साथ ही अटूट भंडारा लगाया।
इस दौरान मंदिर में सुबह से लेकर देर सांय तक पूजा-अर्चना करने वालों का तांता लगा रहा। मेला परिसर में अलग-अलग राज्यों व क्षेत्रों से आए सामान की महिलाओं एवं बच्चों ने जमकर खरीदारी की। झूलों व अन्य खेल का बच्चों ने आनंद उठाया। मेले में भीड़ के मद्देनजर पुलिस सुरक्षा और कार सेवक व्यवस्था बनाने में लगे रहे। महंत सुमेर दास ने बताया कि गांव मटौर के श्री तीर्थ का संबंध महाभारत, वामन पुराण और भागवत पुराण से है। इस धरा पर तीर्थों की श्रृंखला में माता मुकुटेश्वरी तीर्थ, श्री तीर्थ और शिव की महिमा को समर्पित श्री खटवांगेश्वर तीर्थ शामिल हैं। महंत सुमेर दास बताते हैं कि राजा खट्वांग की ओर से की गई आराधना के बाद जब भगवान शिव उनसे प्रसन्न हुए तो उन्हें उनके नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद मिला। जिसके बाद खड़ालवा गांव में पाताल लोक से प्रकट शिवलिग का नाम खटवांगेश्वर पड़ा। इसके बाद से शिवलिंग का वजूद नहीं मिटा है। शिव मंदिर एक ऊंचे टीले में स्थापित है। इसकी ऊंचाई करीब 120 फीट है। मंदिर परिसर में भव्य हवन कुंड भी स्थापित किया गया है। इसमें सैंकड़ों श्रद्धालु हवन करते हैं।