संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड/सीवन। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से म्हारा पोषण-म्हारी पंचायत अभियान के तहत चूहड़माजरा की आंगनबाड़ी और सीवन के फिरोजपुर गांव में गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार वितरित किया गया। इस मौके पर उनसे कहा गया कि गर्भावस्था में पौष्टिक आहार जरूरी होता है।
ढांड में कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच कविता ने की। सुपरवाइजर शीतल ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विशेषकर गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार लेना चाहिए। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं, आगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं, महिला पंच, आशा वर्कर शामिल रहीं।
सुपरवाइजर शीतल ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहने के लिए कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इनमें विटामिन, मिनरल और स्वस्थ वसा शामिल है। हर रोज पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए। कहा कि गर्भावस्था में अगर पर्याप्त मात्रा में प्रोटिन का प्रयोग नही किया गया तो इसकी वजह से वजन कम होना, बार-बार संक्रमण और मांसपेशियों में थकान महसूस होने लगती है।
इसके अलावा सूजन बार-बार मूड बदलना,कमजोरी और भूख लगना इसका मुख्य कारण हो सकता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान आपको फोलिक एसिड,आयरन,कैलिषयम,विटामिन डी,ओमेगा 3 फैटी एसिड,विटामिन बी और सी की आवश्यकता होती है। जिसकी पूर्ति फोर्टिफाइड अनाज, ब्रेड, पास्ता, मूंगफली, हरे पत्तेदार सब्जियां, संतरे का जूस और बींस से की जा सकती है।
कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं को फल,हरी पत्तेदार सब्जियां व पौष्टिक आहार वितरित किया गया। इस अवसर पर फूल कुमारी, सुनीता, संतोष, राजबाला व चलती भी मौजूद रहीं।
सीवन के आंगनबाड़ी केंद्र फिरोजपुर में महिला एवं बाल विकास विभाग की तरफ से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुपरवाइजर कुसुम देवी ने कहा कि शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होने के कारण कुपोषण होता है। इसके कारण शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है। संतुलित आहार और पोषण शिक्षा से कुपोषण को रोका जा सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, दूध, फल और प्रोटीन युक्त भोजन करें तो कुपोषण से बच सकते हैं।
उन्होंने कहा कि संतुलित आहार में सभी आवश्यक पोषक तत्व शामिल होने चाहिए। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विशेष पोषण देना चाहिए। हमें स्वच्छ पानी पीना चाहिए और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। समय पर टीकाकरण करवाना चाहिए और स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। शारीरिक गतिविधि और व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना चाहिए। स्तनपान को बढ़ावा देना चाहिए, जिससे शिशु को पूरा पोषण मिल सके।