संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को अंग्रेजी वर्णमाला सिखाने का पारंपरिक तरीका अब बदलने जा रहा है। विद्यार्थी अक्षरों की पहचान ऐपल, बॉल और कैट के बजाय योगासन, भारतीय ज्ञान परंपरा और स्वस्थ जीवनशैली से जुड़े शब्दों से करेंगे। इसके तहत ए फॉर आसन, बी फॉर बॉडी, सी फॉर चक्र और जी फॉर ज्ञान मुद्रा जैसे शब्दों से बच्चों को पढ़ाया जाएगा। हरियाणा योग आयोग ने इस उद्देश्य से एबीसी ऑफ योगा चार्ट्स इंग्लिश सीरीज-1 जारी की है।
इस पहल के जरिये पढ़ाई को रोचक बनाने के साथ बच्चों को बचपन से ही योग के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। चार्ट में अंग्रेजी वर्णमाला के प्रत्येक अक्षर को योग, स्वास्थ्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों के साथ जोड़ा गया है। इसमें ई फॉर ईगल पोज, एफ फॉर फाइव सेसीज, एच फॉर हास्य योग, आई फॉर ईश्वर प्रणिधान, जे फॉर जल नेति, के फॉर कपालभाति, एल फॉर लोटस पोज और एम फॉर मंत्र जैसे शब्द शामिल किए गए हैं।
इसी तरह टी फॉर त्राटक, यू फॉर उपनिषद, वी फॉर वेद, डब्ल्यू फॉर व्हील पोज और एक्स फॉर एक्स-रे विजन के जरिये भी बच्चों को नई अवधारणाओं से परिचित कराया जाएगा। चार्ट में अक्षरों के साथ चित्रों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक आसान और आकर्षक बन सके।
इस शिक्षण पद्धति को प्रदेश के राजकीय प्राथमिक स्कूलों में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए जल्द ही 10,500 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद चार्ट को शिक्षण कार्य का हिस्सा बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। 7 अक्तूबर को पंचकूला में हरियाणा योग आयोग की बैठक में वर्ष 2022 से इस चार्ट को लेकर चल रहे शोध पर मुहर लगाई गई और इसे स्कूलों तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया।
योग आधारित शिक्षण पद्धति से संबंधित शोध यूजीसी केयर लिस्टेड एनसीईआरटी जर्नल ‘द प्राइमरी टीचर’ में भी प्रकाशित हुआ है। इस पहल के तहत सांप-सीढ़ी, लूडो और शतरंज जैसे खेलों से भी पढ़ाई को अधिक रोचक और गतिविधि आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
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योग और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ेंगे विद्यार्थी
हरियाणा योग आयोग के सदस्य डॉ. मनीष कुकरेजा ने बताया कि चेयरमैन डॉ. जगदीप आर्य के मार्गदर्शन में खेल-खेल में शिक्षा देने और योग के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में योग शिक्षा पर आधारित अंग्रेजी वर्णमाला का चार्ट जारी किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ योग, स्वास्थ्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ना है।