कैथल। नगर परिषद में प्रापर्टी-विकास शुल्क को घटा कर कौड़ियों के भाव चहेतों को एनओसी बांट दी गई। करीब 70 प्रापर्टी आईडी में गड़बड़ की गई। सरकार को करीब डेढ़ करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। यह खुलासा पांच सदस्यीय कमेटी की ओर से डीएमसी कार्यालय में सौंपी गई प्रापर्टी आईडी गड़बड़ी के मामले की रिपोर्ट में हुआ है।
कमेटी सदस्य सचिव मोहन लाल ने बताया कि जांच में सामने आया है कि इस गड़बड़ी के तार नगर परिषद के ईओ की लॉग-इन आईडी से जुड़े हैं। शुरुआती जांच में ही करीब 1.5 करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ी उजागर हो चुकी है। जांच कमेटी की ओर से की गई स्क्रूटनी के दौरान कुल 109 प्रापर्टी आईडी की गहराई से जांच की गई। इनमें से 70 प्रापर्टी आईडी में भारी वित्तीय अनियमितता और नियमों का उल्लंघन पाया गया। उन्होंने बताया कि अपनी आर्थिक दोस्ती और निजी स्वार्थ साधने के लिए अधिकारियों ने सरकारी रिकॉर्ड के साथ जमकर खिलवाड़ किया। कई संपत्तियों के विवरण बदल दिए गए, तो कई जगहों पर नियमों को दरकिनार कर एक-दूसरे के नाम प्रापर्टी आईडी ट्रांसफर कर दी गईं।
कौड़ियों के भाव बांटी एनओसी
इस घोटाले का मुख्य तरीका प्रापर्टी-विकास शुल्क को अवैध रूप से कम करना था। जिन संपत्तियों पर लाखों रुपये का विकास शुल्क बनता था, उनकी आईडी में बदलाव कर उस शुल्क को महज कुछ हजार रुपये दिखा दिया गया। इसके बाद, कम पैसे जमा करवाकर नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए। सरकारी खजाने में जो पैसा जाना चाहिए था, वह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा खेल ईओ की लॉग-इन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करके किया गया।
जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर ईओ के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई के लिए फाइल उच्च अधिकारियों व संबंधित निदेशालय को भेजी जाएगी। इसके साथ ही जिन प्रापर्टी मालिकों को गलत तरीके से एनओसी जारी की गई है, उनसे दोबारा वास्तविक विकास शुल्क वसूलने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
सात जुलाई का प्रकाशित समाचार।
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