कोरोना महामारी के चलते जनता से सीधे जुड़े विभागों में लॉकडाउन के बाद अब तक काम पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौट पाया है। लॉकडाउन के बाद जिला नागरिक अस्पताल में विभिन्न बीमारियों के मरीजों की संख्या में तो बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन अस्पताल में पहले से ही स्टाफ की कमी के चलते मरीजों की देखरेख संबंधित समस्याएं और ज्यादा बढ़ गई हैं। अब अस्पताल में ऐसे हालात बने हुए हैं कि सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी मरीजों को कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।
सोमवार को दोपहर से पहले अस्पताल में ऐसे ही हालात दिखाई दिए। ओपीडी कक्षों के बाहर, डिस्पेंसरी, सिटी स्कैन केंद्र, ब्लड सेंपलिंग रूम व अन्य स्थानों पर मरीजों की भीड़ लगी रही। अस्पताल प्रबंधन की सख्ती के कारण वहां आए मरीज और उनके परिजन मुंह पर मास्क या फिर कपड़ा तो ढके दिखाई दिए, लेकिन सामाजिक दूरी के नियमों की पालना कहीं दिखाई नहीं दी।
गौरतलब है कि अस्पताल में कोरोना महामारी से पहले रोजाना 2000 से 2200 के बीच ओपीडी होती थी। लॉकडाउन के दौरान ओपीडी प्रतिदिन 200 तक आ गई थी। अब फिर से संख्या 1200 से लेकर 1400 के बीच पहुंच गई है। डॉक्टर कम और ज्यादातर की कोरोना में ड्यूटी के कारण ओपीडी के लिए आने वालों का इंतजार भी बढ़ा है।
स्वीकृत 55 पदों में से 19 डॉक्टर ही वर्किंग में
जिला नागरिक अस्पताल में इस समय डॉक्टरों के स्वीकृत पद 55 हैं, लेकिन उनमें से केवल 19 डॉक्टर ही वर्किंग में हैं। सात डॉक्टर पिछले काफी समय से अनुपस्थित चल रहे हैं। अब इन्हीं 19 डॉक्टरों पर सामान्य मरीजों के साथ-साथ कोरोना संक्रमितों की देखरेख का कार्यभार है। यही डॉक्टर ओपीडी देख रहे हैं और ये ही इमरजेंसी और अन्य सेवाओं पर तैनात हैं।
कोरोना संक्रमितों के लिए हो रहा बेड का उपयोग
जिला नागरिक अस्पताल में 200 बेडों में से 70 बेड कोरोना संक्रमितों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। ऐसे में अस्पताल में बेडों की भी कमी बन गई है। जच्चा-बच्चा वार्ड में पहले की एक-एक बेड पर दो-दो महिलाओं को रखा जाता था, अब स्थिति पहले से भी खराब हो गई है।
गर्भवती महिलाओं की परेशानी बढ़ी
गर्भवती महिलाओं की परेशानी और ज्यादा बढ़ गई है। अस्पताल में जो महिलाएं सुबह 10 बजे जांच करवाने के लिए पहुंच गई थी, उनकी दोपहर तक भी जांच नहीं हो पाई। महिलाओं और उनके साथ आए लोगों में इस बात को लेकर रोष भी दिखाई दिया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने परिजनों को डॉक्टरों की स्थिति के बारे में बताया तो वे इंतजार के लिए राजी हुए।
कोरोना काल में अस्पताल में आए पांच वेंटिलेटर और लिथोट्रिप्सी मशीन
कोरोना काल में अस्पताल में पांच वेंटिलेटर और एक लिथोट्रिप्सी मशीन नए आए हैं। शुरुआत में तीन वेंटिलेटर इंस्टॉल किए गए थे, लेकिन बाद में इनकी संख्या बढ़ाकर पांच की गई। वहीं किडनी की पत्थरी निकालने के लिए लिथोट्रिप्सी मशीन नई आई है।
गांव जाखौली से गर्भवती पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचे सुशील ने बताया कि वह सुबह साढ़े आठ बजे अस्पताल में पहुंच गया था। करीब 12.30 बजे तक भी उसकी पत्नी की जांच नहीं हो पाई है। ये भी पता नहीं कि और कितना समय लगेगा।
पुत्रवधू की जांच के लिए पहुंची अर्जुन नगर निवासी शीला देवी ने कहा कि करीब तीन घंटे से वे जांच के लिए इंतजार कर रहे हैं। ओपीडी के बाहर बड़ी संख्या में महिलाएं खड़ी हैं। कम से कम यहां तो डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
खरादिया मोहल्ला निवासी सुनील ने बताया कि उसकी पत्नी करीब दो-ढाई घंटे से जांच के लिए रूम के बाहर बैठी है। गर्मी भी काफी है और ओपीडी के बाहर भीड़ लगी हुई है। ऐसे में इलाज कम और परेशानी ज्यादा मिल रही है।
स्टाफ की कमी के चलते अस्पताल में स्थिति नियंत्रित रखने का पूरा प्रयास कर रहे हैं। जगह की कमी के कारण सोशल डिस्टेंस की समस्या आ रही है। जो स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं, उन्हीं की कोरोना में ड्यूटी लगाई गई है।
डॉ. ओमप्रकाश, प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर