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Kaithal News: किसी के पास किस्म पहचानने का पैरामीटर नहीं ः डा.आरबी सिंह

Sat, 29 Nov 2025 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत (कैथल)। अनाज मंडियों में बारीक धान की किस्मों को लेकर इन दिनों किसानों और मिलरों के बीच खींचतान तेज हो गई है। इस संदर्भ में पूसा 1121 व उसकी वंशावली की किस्मों पर शोध कर चुके ब्रीडर डॉ. आर.बी. सिंह और डॉ. दारा सिंह

ने पुष्टि की है कि यह विवाद कई वर्षों से जारी है और किसान लगातार नुकसान झेल रहे हैं।

डा.आरबी सिंह ने कहा कि किसी मिलर के पास धान की किस्म को पहचानने के कोई पैरामीटर नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 1121 श्रृंखला की किस्मों में मामूली अंतर होता है, जिसे केवल ब्रीडर ही पहचान सकता है।
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गौरतलब है कि किसान जहां अपने खेतों में तैयार हुई पीबी 1121 किस्म को बेचने के लिए मंडियों में पहुंचते हैं, वहीं अनेक मिलर उसी धान को 1718 या 1885 बताकर कम कीमत पर खरीदने का दबाव बना रहे हैं।

नाराज किसानों का कहना है कि वे कई-कई दिनों तक मंडी में फसल लेकर पड़े रहते हैं, लेकिन खरीददार 1121 के नाम पर उचित कीमत देने को तैयार नहीं होते। किसानों के मुताबिक, ऐसे में जब पूसा 1121 के जीन से विकसित नई किस्में अधिक पैदावार और रोग प्रतिरोधक क्षमता से युक्त हैं, तो उनकी कीमतें कम कैसे हो सकती हैं? किसानों के अनुसार मिलर जानबूझकर 300–400 रुपये प्रति क्विंटल कम देने के लिए धान का नाम बदल देते हैं।

डॉ. सिंह के अनुसार पूसा बासमती 1121 को लंबी संकरण प्रक्रिया से विकसित किया गया था और इसे सबसे पहले 2003 में पूसा सुगंध-4 के रूप में जारी किया गया।

उन्होंने बताया कि 2007 तक यह किस्म किसानों के बीच व्यापक रूप से लोकप्रिय हो गई और 2008 में इसका नाम बदलकर पूसा बासमती 1121 कर दिया गया। पकाने पर इसके दानों के सबसे अधिक बढ़ने का विश्व रिकॉर्ड है।

उन्होंने बताया कि इसकी कमजोरी यह रही कि यह बैक्टीरियल ब्लाइट और ब्लास्ट जैसे रोगों के प्रति संवेदनशील थी तथा खरपतवार प्रतिस्पर्धा में भी कमजोर थी। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली ने पूसा बासमती 1718, 1885 और 1979 जैसी उन्नत किस्में विकसित कीं, वहीं जो मार्कर-सहायता प्राप्त बैकक्रॉस प्रजनन तकनीक से तैयार की गई हैं और 1121 की लगभग समजीनिक प्रजातियाँ हैं।



पूसा बासमती 1718



यह किस्म एक जीवाणु झुलसा प्रतिरोधी किस्म है जिसमें जीवाणु झुलसा के लिए दो प्रतिरोधी जीन मौजूद हैं। जीवाणु झुलसा रोग के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता दिखाई है और स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के उपयोग को महत्वपूर्ण रूप से कम किया है



पूसा बासमती 1885



पूसा बासमती 1121 का एक दोहरा रोग प्रतिरोधी संस्करण है जिसमें बैक्टीरियल ब्लाइट के लिए दो प्रतिरोधी जीन और ब्लास्ट के लिए दो प्रतिरोधी जीन हैं। पूसा बासमती 1885 ने पूसा बासमती 1121 की तुलना में 5.5 प्रतिशत उपज श्रेष्ठता के साथ दोनों रोगों के प्रति उच्च स्तर की प्रतिरोधक क्षमता दिखाई है।
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पूसा बासमती 1979



एक गैर-जीएम शाकनाशी सहिष्णु बासमती चावल की किस्म है जो शुष्क सीधी बुवाई वाले चावल (डीएसआर) की खेती के लिए उपयुक्त है। इस विशेषता के कारण पूसा बासमती 1979 डीएसआर खेती के लिए आदर्श है।



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