संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत बस अड्डे की पहचान इन दिनों गायब है। इसके चलते हरियाणा राज्य परिवहन का यह बस अड्डा लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी पहचान को तरस रहा है।
दरअसल, भवन की दीवारों पर राजनीतिक दलों का जमकर प्रचार-प्रसार हो रहा है लेकिन करीब 17 वर्ष पहले तत्कालीन विधायक गीता भुक्कल के प्रयासों से शुरू हुए इस बस अड्डे पर वर्तमान में पहचान के तौर पर कोई साइन बोर्ड नहीं है। कुछ समय पहले जो साइन बोर्ड लगा था उस पर कलायत की बजाय कैथल लिखा था।
इस कारण कई बार दूर-दराज से इलाके मेंं पहली बार आने वाले यात्री कैथल की बजाय कलायत सामान्य अड्डे पर बस से उतर जाते थे। प्रीत जगदेव, विकास कुमार व अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि कहीं न कहीं जिम्मेवार कर्मियों ने इसे संजीदगी से लेने की बजाय यह दलील दी कि धूप मेेंं कलायत लिखे शब्द उड़ गए हैं।
इस प्रकार का तर्क गैर जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली को जाहिर करता है। बाद मामले के संज्ञान में आने के बाद परिवहन विभाग कैथल के महाप्रबंधक कमलजीत सिंह ने इसे उतारकर कलायत के नाम का उल्लेख करते हुए साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए।
साइन बोर्ड को उतार तो दिया गया है, लेकिन नया बोर्ड नहीं लगाया गया है। प्रतिदिन कलायत बस अड्डा के माध्यम से एक से दूसरे स्थान पर जाने वाले स्कूल-कॉलेज विद्यार्थियों और आम यात्रियों का कहना है कि न केवल मुख्य साइन बोर्ड मौके पर नहीं बल्कि प्रवेश-निकासी गेट पर भी कोई साइन बोर्ड या संकेतक नहीं है। इसके अलावा बस अड्डे पर पेयजल, शौचालय, रोशनी, सुरक्षा व अन्य सुविधाओंं की सख्त जरूरत है। थोड़ा अंधेरा होते ही बस अड्डा अंधेरे में डूब जाता है।
इस संबंध मंे रोडवेज महाप्रबंधक कमलजीत सिंह ने कहा कि कलायत बस अड्डे पर मुख्य साइन बोर्ड के साथ-साथ कुछ अन्य समस्याएं उनके संज्ञान में आई हैं। कर्मियोंं को इसका नाम का प्रमुखता से उल्लेख करते हुए साइन बोर्ड व सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य द्वारों पर प्रवेश-निकासी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रियों और आम जन को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी।