कैथल। जिले में कराटे खिलाड़ियों को आज भी सरकारी स्तर पर प्रशिक्षक की सुविधा नहीं मिल रही है। खेल विभाग में कराटे कोच का पद स्वीकृत नहीं होने के कारण खिलाड़ियों को निजी अकादमियों और कराटे एसोसिएशन के माध्यम से प्रशिक्षण लेना पड़ रहा है। इसके बावजूद जिले के कई खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
खेल विभाग के अधिकारियों के अनुसार केवल कैथल ही नहीं बल्कि लंबे समय तक पूरे हरियाणा में कराटे का नियमित सरकारी कोच नहीं था। विभाग में नियमित कोच भर्ती के लिए संबंधित खेल में उत्कृष्ट उपलब्धियों के साथ एनआईएस डिप्लोमा अनिवार्य होता है। हालांकि कराटे खेल में एनआईएस डिप्लोमा उपलब्ध नहीं होने के कारण इस खेल में नियमित कोचों की भर्ती नहीं हो सकी। हाल ही में हरियाणा में एक कराटे कोच की नियुक्ति हुई है लेकिन वह भी विभाग की आउटस्टैंडिंग स्पोर्ट्स पर्सन श्रेणी के तहत की गई है। कैथल जिले में अब भी कराटे कोच का कोई स्वीकृत पद नहीं है। जबकि कराटे खेल लंबे समय से कॉमनवेल्थ, ओलंपिक सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का हिस्सा रहा है। इसके बावजूद राज्य स्तर पर इस खेल को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने से खिलाड़ी निजी संसाधनों के सहारे आगे बढ़ने को मजबूर हैं।
खेल महाकुंभ में शामिल होने के बाद मिली पहचान
कराटे खिलाड़ियों को पहले खेल विभाग से अपेक्षित मान्यता भी नहीं मिलती थी। इसके कारण राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को खेल कोटे से मिलने वाले कई लाभ, जैसे नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के दौरान ग्रेडेशन प्रमाणपत्र का फायदा नहीं मिल पाता था। पिछले वर्ष हरियाणा खेल महाकुंभ में कराटे को शामिल किए जाने के बाद स्थिति में बदलाव आया है। अब इस खेल के खिलाड़ियों को विभाग की ओर से ग्रेडेशन प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं जिससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ मिलने लगा है।
खेल और खिलाड़ी दोनों के साथ हो रहा भेदभाव
हरियाणा स्पोर्ट्स कराटे एसोसिएशन के जिला सचिव व कराटे कोच मीनू सहोत्रा का कहना है कि कराटे खिलाड़ियों और खेल के साथ वर्षों से भेदभाव हो रहा है। विभाग नियमित भर्ती में एनआईएस डिप्लोमा की शर्त लगा देता है और कराटे में एनआईएस डिप्लोमा दोनों संस्थानों में से कोई नहीं करवा रहा है। उन्होंने कराटे की खेल नर्सरी मांगी तो विभाग ने वह भी नहीं दी। ये कराटे खेल और उसके खिलाड़ियों के साथ स्पष्ट भेदभाव है। हालांकि अब एक कराटे कोच की भर्ती हुई और कराटे खेल को हरियाणा ओलंपिक व खेल महाकुंभ में भी शामिल किया गया है। खिलाड़ियों के ग्रेडेशन सर्टिफिकेट भी अब बने हैं लेकिन उसके बावजूद उनकी सरकार से मांग है कि कई खेल कराटे से निकले हैं और यह बहुत पुराना खेल है। हर जिले में इसके कोच भी होने चाहिए और इस खेल को भी अन्य खेलों की तरह बराबरी का दर्जा दिए जाने की जरूरत है।
जिले में जिन खेलों के कोचों के पद रिक्त हैं, उनकी जानकारी मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। फिलहाल कैथल में कराटे कोच का पद स्वीकृत नहीं है। पद स्वीकृत होने के बाद ही जिले को सरकारी कोच उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जिले के कराटे खिलाड़ी लगातार पदक जीत रहे हैं, जबकि नए पद सृजित करने का निर्णय मुख्यालय स्तर पर लिया जाता है।
- राजरानी, जिला खेल अधिकारी, कैथल।
कराटे की निजी अकादमी में अभ्यास करते खिलाड़ी।