कैथल। गेहूं का सीजन सिर पर है, लेकिन अनाज मंडियां अभी इसके लिए तैयार नहीं हैं। मंडियों में सड़कों एवं सीवरेज की स्थिति बदहाल है। नई एवं पुरानी अनाज मंडी में फीड़ों में बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं।
जिस कारण सीजन में किसान हादसों का शिकार होते हैं। आढ़तियों तुरंत प्रभाव से दोनों अनाज मंडियों में सुविधाएं जुटाने की मांग की है, ताकि सीजन में न तो किसानों को परेशानी हो और न ही आढ़तियों एवं मजदूरों को।
ये हैं समस्याएं
पक्के फीड़ गड्ढों में बदले
नई एवं पुरानी अनाज मंडियों में गेहूं डालने के लिए बनाए गए फीड़ पक्के तो हैं, लेकिन कई जगहों पर फीड़ो में बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। सीजन में ट्रालियां तक पलटने का डर बना रहता है। आढ़तियों का कहना है कि फीड़ कई जगह पर इतने ऊंचे-नीचे हैं कि सीजन में कई किसान चोटिल हो जाते हैं। इनमें सुधार किया जाना चाहिए।
सड़कों एवं सीवरेज की हालत खस्ता
आढ़ती विजय कुमार, सतीश कुमार, सत्यवान और संजू ने कहा कि मंडियों में सड़कें टूटी पड़ी हैं। सीजन में एक बार पैच लगाकर खानापूर्ति की जाती है। इसके बाद सीजन में वही सड़कें फिर से उखड़ जाती हैं। एक ही बार में इनकी हालत दुरुस्त की जानी चाहिए, ताकि बार-बार पैसा खर्च न करना पड़े। इसके अलावा शौचालयों की हालत भी खस्ता है। उसमें से बदबू उठ रही है। अनाज मंडी में सीवरेज बंद पड़े हैं। थोड़ी सी बरसात में ही मंडी में पानी एकत्रित हो जाता है। सीजन में सीवरेज की बदहाली बड़ी समस्या बन जाती है। इसके अलावा लाइटें भी खराब हैं।
दोनों अनाज मंडियों में जगह की दिक्कत : मित्तल
जिले भर में इस सीजन में 81 लाख क्विंटल से अधिक गेहूं की आवक का अनुमान लगाया गया है। जिसमें से अधिकतर गेहूं कैथल शहर की नई एवं पुरानी अनाज मंडियों में ही आता है।
दोनों ही अनाज मंडियों में जगह कम पड़ने लगी है। नई एवं पुरानी अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान सुरेश मित्तल का कहना है कि जींद रोड पर जो तीसरी अनाज मंडी तैयार की जा रही है, उसमें कच्चे फीड़ को पक्का किया जाए, ताकि जगह की कमी न रहे। मंडियों में बंद पड़े सीवरेज, टूटी सड़कों, पीने के पानी, बदहाल शौचालयों, बरसाती पानी की निकासी की तुरंत व्यवस्था की जाए। इसके अलावा दोनों ही मंडियों में यातायात व्यवस्था के लिए योजना बने। वे स्वयं इस संबंध में अधिकारियों से मिलकर समस्याओं के समाधान की मांग करेंगे।
सड़कों के रिपेयरिंग शुरू होगी : सचिव
मार्केट कमेटी सचिव रविंद्र सैनी ने कहा कि शीघ्र ही सड़कों की रिपेयर शुरू की जाएगी। इसके अलावा नलकों एवं वाटर कूलरों की सर्विस भी 31 मार्च तक करवा दी जाएगी। लाइटों की व्यवस्था भी अप्रैल के पहले सप्ताह में ठीक करवा दी जाएंगी। सीवरेज जहां से भी ब्लॉक हैं, जहां से ये टूटे हुए हैं, उसके लिए जनस्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखा है। प्रयास किया जाएगा कि सीजन में आढ़तियों, मजदूरों एवं किसानों को कोई परेशानी न हो।
इस बार दो माह ही चलेगा
गौरतलब है कि इस बार सरकार ने गेहूं के सीजन में कटौती करते हुए इसे माह तक कर दिया है। इसके तहत अब एक अप्रैल से 31 मई तक गेहूं की सरकारी खरीद-फरोख्त होगी। इससे पहले, सीजन तीन महीने तक चलता था।