संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत में डोर-टू-डोर सफाई कार्य के लिए किसी तरह के डंपिंग यार्ड का प्रावधान फिलहाल नहीं है। उप मंडल सचिवालय से कुछ दूरी पर पिंजुपुरा रोड पर जिस स्थान पर कचरा डाला जा रहा है वह केवल कचरा ट्रांसफर प्लांट है।
डंपिंग यार्ड की व्यवस्था करनाल, कैथल व कुरुक्षेत्र शहर में है। संबंधित निकायों को अपने-अपने शहर में एकत्रित किए गए कचरे को तत्काल प्रभाव से डंपिंग यार्ड में पहुंचाना होता है। कलायत में बड़ा मुद्दा बन चुके डोर-टू-डोर सफाई पर नगर पालिका सचिव पवन शर्मा ने नपा प्रशासन ने इसकी सफाई दी है।
उनका कहना है कि जो निर्देश जारी किए गए हैं उनके अध्ययन से उन्हें अब यह जानकारी मिली है कि कलायत शहर में डंपिंग यार्ड की बजाय कचरा ट्रांसफर प्लांट का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत प्रतिदिन शहर से जिस कचरे का उठान होता है उसे ट्रांसफर प्लांट में एकत्रित करते हुए डंपिंग यार्ड में पहुंचाने के निर्देश हैं।
भार को जांचने के लिए नगर पालिका निर्धारित धर्म कांट के अलावा किसी भी कांटे पर इसकी पुन: जांच कर सकती है। इसके चलते ही प्लांट में धर्म कांटे की व्यवस्था नहीं है। जन सुविधा के लिए कचरा उठान में लगे वाहनों पर जीपीएस सिस्टम क्रियाशील किया गया है। शहर वासियों का कहना है कि यदि कलायत शहर में केवल कचरा ट्रांसफर प्लांट का प्रावधान है तो किन कारणों के चलते नौ माह से इस स्थान पर कचरे के ढेर लगे हैं।
सरकार के नियम अनुसार प्लांट से प्रतिदिन शहर से एकत्रित किए गए कचरे को तुरंत प्रभाव से डंपिंग यार्ड में पहुंचाने के निर्देश हैं।
शहर में इस वर्ष का डोर-टू-डोर टेंडर 29 जनवरी 2023 को शुरू हुआ। उसके कुछ समय के बाद ही कचरा ट्रांसफर प्लांट ओवरफ्लो हो गया। ऐसे में निर्धारित स्थान की बजाय इधर-उधर कचरा फेंकने के आरोप नगर पालिका और एजेंसी पर लगे।
मामला उस समय तुल पकड़ गया जब एजेंसी ने पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा तालाबों के संरक्षण को लेकर दिए गए आदेशों को दर किनार करते हुए कचरे को तालाबों में फेंक दिया। इस पर प्रशासन ने संज्ञान लिया और कचरे को तालाबों के किनारों से वापस उठाया गया। सफाई की स्थिति के साथ-साथ सुविधाएं न मिलने पर सफाई कर्मी पर काफी समय हड़ताल पर रहे। इस प्रकार के गंभीर विषयों को ही करीब चार माह से कलायत में डोर टू डोर एजेंसी को भुगतान न करने की वजह बताया जा रहा है।