एसडी स्कूल में बुधवार को हमारे बुजुर्ग हमारी धरोहर दिवस मनाया गया। इस मौके पर बच्चों के दादा-दादी, नाना-नानी भी स्कूल में पहुंचे। विद्यालय में कुछ अलग ही फिजा थी। यहां केजी के सोनू के साथ उसकी दादी भी स्कूल आई थी।
स्कूल के ग्राउंड में आयोजित इस गैर कार्यक्रम में सबसे पहले मंत्रोचारण के साथ बुजुर्गों का औपचारिक अभिनंदन किया गया। एसडी सभा के प्रधान रविंद्र बिंदलिश बोलने खड़े हुए तो भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि वे लोग बड़े खुशकिस्मत होते हैं जो अपने दादा दादियों के हाथों में पलते बढ़ते हैं।
उनसे राजा रानियों की कहानियां सुन सुनकर जीवन के सबक सीखते हैं। उन्होंने कहा कि आज का बचपन तो बस इंटरनेट और टीवी का गुलाम होकर रह गया है। स्कूल की प्रिंसिपल हरप्रीत कौर ने बच्चों को सीख दी कि हर रोज कम से कम एक घंटा अपने बुजुर्गों के पास जरूर बिताएं।
उनसे खूब बातें करें। दुख सुख पूछें और अगर वे बीमार हैं तो उनकी खूब देखभाल करें। प्रिंसिपल ने बच्चों को इस बात की शपथ भी दिलाई कि वे अपने बुजुर्गों का कहना मानेंगे और उनका सम्मान करेंगे।
बेटे से ज्यादा पोते से लगाव
कार्यक्रम में शामिल होने आए बुजुर्ग भी आज खूब मस्त मूड में थे। अजमेर सिंह सैनी बोले कि जिस तरह साहूकार को मूलधन से ब्याज प्यारा होता है उसी तरह बाप को अपने बेटे से ज्यादा लगाव पोते से होता है। नए दौर की पढ़ाई की व्यस्तता ने दादा पोते के इस रिश्ते को प्रभावित किया है। एसडी स्कूल ने आज बुजुर्गों के सम्मान में कार्यक्रम करके इस रिश्ते में गर्माहट बहाल कर दी है। मोती राम बोले बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जानी चाहिए तभी तो वे रिश्तों की अहमियत समझेंगे और बड़ेे बूढ़ों का सम्मान करेंगे।