प्रशासन शहर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की एक जगह रिकार्डिंग देखने के लिए अब तक कंट्रोल रूम नहीं बना पाया है। इस काम में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। लोगों की मांग पर अधिकतर कैमरों में डीवीआर भी लगा दी गई है, लेकिन कंट्रोल रूम का न बन पाना एक बड़ा सवाल है। यह कह सकते हैं कि प्रशासन शायद किसी बड़ी वारदात के इंतजार में है।
करीब ढाई साल पहले शहर के चौक-चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। कहने को तो इस समय शहर में करीब 26 चौक-चौराहों और पार्कों में 70 कैमरे लगे हुए हैं लेकिन इन कैमरों से पुलिस को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। करीब साल भर तो इन कैमरों में डीवीआर ही नहीं लगाई गई थी। जिस कारण इनमें रिकॉर्डिंग ही नहीं हो पा रही थी।
बाद में जब मांग उठी तो इनमें डीवीआर लगवाई गई लेकिन तय योजना के तहत इनकी रिकॉर्डिंग देखने के लिए बनाया जाने वाला कंट्रोल रूम अब तक नहीं बन पाया है।
यदि शहर के लगे चौक-चौराहों के ये कैमरे सही काम कर रहे होते तो मनीष मित्तल हत्याकांड अब तक सुलझ गया होता। जिन चौकों से होकर हत्यारा फरार हुआ था, उन सभी चौकों पर सीसीटीवी कैमरे खराब हालत में थे जिस कारण पुलिस को हत्यारे को पकड़ने में इन कैमरों से कोई सहयोग नहीं मिला।
सांसद राजकुमार सैनी ने इस कांड के बाद कैमरों के लिए शहर में 10 लाख रुपये की राशि देने का एलान किया गया था लेकिन अब तक यह राशि नगर परिषद में नहीं पहुंची है।
यदि पुलिस को इस समय इन कैमरों की रिकॉर्डिंग की जरूरत पड़ जाए तो खंभों के ऊपर चढ़कर तकनीकी सहायक को लेकर रिकॉर्डिंग लेनी पड़ती है। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय खराब होता है।
एसपी कृष्ण मुरारी का कहना है कि पुलिस को हर रोज इन कैमरों की जरूरत पड़ती है। सड़क दुर्घटना, छीना झपटी, लूट, चोरी सहित बड़ी वारदात में इन कैमरों की जरूरत पड़ती है लेकिन इन कैमरों के लिए एक सेंटर बनाए जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। संबंधित अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई चुकी है।