फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जन-जन को बताएंगे सरस्वती का महत्व : डीसी

Fri, 12 Feb 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
विज्ञापन
विज्ञापन
डीसी निखिल गजराज ने वीरवार शाम भाई उदय सिंह के किले पर आयोजित सरस्वती महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सरस्वती नदी की जानकारी पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही सरकार द्वारा शुरू की गई प्रदर्शनी वैन भी कैथल पहुंची।
विज्ञापन


डीसी ने कहा कि सरस्वती नदी हमारी प्राचीन संस्कृति का हिस्सा है, जिसे हमें सहेजना है। हमें सरस्वती की जानकारी को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि लोगों को पवित्र नदी के बारे में जानकारी हासिल हो सके।

इस नदी का जिले में 63 किलोमीटर का प्रवाह रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से हरियाणा राज्य सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड का गठन किया गया है। डीसी ने बताया कि भाई उदय सिंह किला परिसर में आयोजित सरस्वती प्रदर्शनी में सिंधु-सरस्वती और गंगा नदी घाटियों में अव्यवस्थित कुछ स्थलों को मानचित्र में दर्शाया गया है। इससे पहले एडीसी जितेंद्र कुमार ने थाना गांव में सरस्वती प्रचार यात्रा का स्वागत किया, जो प्रदर्शनी स्थल पर आकर रुकी। यह यात्रा 12 फरवरी को कलायत के लिए रवाना होगी।
विज्ञापन


इस मौके पर एसपी कृष्ण मुरारी, एडीसी जितेंद्र कुमार, एसडीएम मनदीप कौर, सीटीएम नवीन आहुजा, भाजपा के जिलाध्यक्ष सुभाष हजवाना, रणधीर गोलन, रविभूषण गर्ग, राजपाल तंवर, संजय भारद्वाज, सतीश शर्मा, डीआरओ दलेल सिंह, तहसीलदार ओपी बिश्नोई सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

प्रदर्शनी में यह बताया जा रहा
सिंधु-सरस्वती तथा गंगा क्षेत्र से वैदिक संस्कृति का विस्तार संपूर्ण भारत में होना भी इस प्रदर्शनी में दर्शाया गया है। ऋग्वेद में नदियों में सरस्वती को सबसे विशाल एवं प्रभावशाली बताया गया है लेकिन महाभारतकाल में सरस्वती नदी के निरंतर न बहने का विवरण मिलता है। इसरो ने सरस्वती नदी समूह के प्रवाह, पलायन तथा लोप के वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध करवाए हैं। कैलाश मानसरोवर झील से सरस्वती नदी की उपनदी सतलुज का उद्गम,  शिवालिक पर्वत शृंखला में सिरमौर क्षेत्र से सरस्वती नदी का आदिबद्री से उद्गम तथा हिमनदी गढ़वाल से होती हुई सरस्वती नदी में मिलने के तीन स्त्रोतों की पहचान की गई है। ऋग्वेद के एक से नौ मंडलों तक सरस्वती ही सर्वाधिक वंदनीय नदी रही है। इसमें कैथल की जानकारियां भी प्रदर्शित की गई हैं। इसमें थेह पोलड़ के समीप उत्खनन से प्राप्त पशु मूर्तियां, मुहरें और उसकी छाप प्रदर्शित की गई है।

कलायत में कपिल मुनि मंदिर तथा च्यवन गिरि कुंड का सेटेलाइट से मानचित्र दर्शाया गया है। कलायत में प्राचीन ईंटों से बने मंदिर का विहंगम दृश्य भी प्रदर्शनी में दर्शाया गया है। इस प्रदर्शनी में सरस्वती नदी के उद्गम स्थल यमुनानगर के मुगलवाली/आदीबद्री में पानी के जमाव को दर्शाया गया है, जहां से यह नदी पिहोवा, कुरुक्षेत्र, कैथल, फतेहाबाद से होते हुए गुजरात के रण मेें इसका प्रवाह दर्शाया गया है। साथ ही आदिबद्री सरस्वती और सोमनदी से उत्खनन से प्राप्त अवशेष, स्तूप का माध्य भाग तथा कर्मकांडीय स्थल दर्शाया गया है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें