जमीन पर चल रहे विवाद के कारण करोड़ा गांव में शव दफनाने से रोकने पर विवाद पैदा हो गया। मृतक के परिजन शव के साथ लघु सचिवालय पहुंच गए। बाद में डीसी के निर्देश पर पुलिस की मौजूदगी में गांव के कब्रिस्तान में ही शव को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
गांव करोड़ा निवासी जीत (65) की शुक्रवार शाम मौत हो गई थी। परिजन शव को दफनाने के लिए गांव के कब्रिस्तान में कब्र खोदने लगे। कब्रिस्तान के साथ लगते एक मकान के मालिक ने उन्हें कब्र खोदने से रोक दिया। सूचना मिलनेे पर नवनिर्वाचित सरपंच बलराज उर्फ भल्ला साथ में 20-25 लोगों को लेकर घटनास्थल पर पहुंचे। सरपंच ने विरोध कर रहे व्यक्ति को समझाया लेकिन उसने बात नहीं मानी। विरोध करने वाले का कहना था कि उसके घर के पास शव न दफनाया जाए।
जमीन पर कब्जे का आरोप
वहीं मृतक के परिजनों का कहना था कि यहां 11 कनाल 4 मरला जमीन कब्रिस्तान की है। इसके कुछ भाग पर अवैध कब्जा कर रखा है और अधिकतर जमीन तालाब में आती है। कुछ भाग खाली है। इस खाली जमीन पर ही शव दफनाए जाते हैं। जहां एक बार शव दफना दिया जाता है, वहां दूसरा शव नहीं दफनाया जाता। विवाद बढ़ने पर मृतक के परिजन शव लेकर कैथल लघु सचिवालय पहुंच गए। इसके बाद डीसी के आदेश पर पुलिस सुरक्षा के बीच मृतक के परिजन शव को लेकर गांव पहुंचे तथा शव को सुपुर्द-ए-खाक किया।
अभी मेरे पास चार्ज नहीं आया है। चार्ज आते ही गांव में पंचायत कर विचार किया जाएगा और जिला प्रशासन से अनुमति ली जाएगी। इसके बाद कब्रिस्तान की जितनी भी जमीन तालाब में है उसे भरवाकर समुदाय को सौंप दिया जाएगा। गांव में कोई विवाद नहीं होने दिया जाएगा। - बलराज, नवनिर्वाचित सरपंच
मामला जातीय न होकर अवैध कब्जे को लेकर है। मामला कोर्ट से संबधित है। शव घर के आगे दफनाने को लेकर विवाद था। गांव में अब शांति है। ग्रामीणों ने भाईचारे की भावना कायम की है। - नवीन, पूंडरी थाना प्रभारी