कड़ाके की ठंड ने सबको बेहाल कर दिया है। हर दिन अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट आ रही है। घने कोहरे और शीत लहर से लोगों की हड्डियां तक कांप रही हैं। शुक्रवार को तापमान में आई गिरावट ने ठिठुरन और बढ़ा दी। अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस रहा तो न्यूनतम गिरकर दो डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सप्ताह भर तक यदि यही मौसम रहा तो बरसात की कमी काफी हद तक पूरी हो जाएगी।
इस सीजन में दिसंबर व जनवरी में बारिश न होने के कारण किसानों सहित कृषि विशेषज्ञ भी हैरान थे। बारिश के इंतजार में गेहूं की फसल में नुकसान होना शुरू हो गया था लेकिन तीन दिन से फसल के अनुकूल वातावरण बना है। वीरवार को दिन में तेज धूप भी निकली थी जिससे फिर से मायूसी छाने लगी थी लेकिन शुक्रवार सुबह छाए घने कोहरे के कारण मौसम में दिन भर ठंडक रही। दिन भर सूर्यदेव के दर्शन नहीं हो पाए। दोपहर बाद कुछ ही देर के लिए धूप निकली। इसके बाद कोहरा छा गया।
प्रगतिशील किसान क्लब के सदस्य सुरेंद्र जाजनपुर ने कहा कि यह मौसम गेहूं की फसल के लिए अनुकूल है। बरसात नहीं होती है तो इस मौसम से ही फसल को काफी लाभ मिलेगा। यह कई दिन तक रहना चाहिए। उन्होंने तो कहा कि ‘इब म्हारी फसल बन ज्यागी। जै यू ए मौसम रह ग्या तो नुकसान कम होवैगा।’
ठंड बढ़ जाने के कारण शहर में दिनचर्या पर इसका असर देखने को मिला। सुबह स्कूल जाते समय बच्चों को काफी दिक्कतें हुईं। छोटे बच्चे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे। अभिभावक रमेश कुमार, संजय, दिनेश ने कहा कि जब सर्दियों की छुट्टियां हुईं, उस समय इतनी ठंड नहीं थीं, अब जब स्कूल खुल गए हैं तो ठंड हो गई है।
तापमान में आई गिरावट के साथ ही ठंड से होने वाली बीमारियों में इजाफा हुआ है। चिकित्सक डॉ. बीबी मक्कड़ का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों को ठंड में ज्यादा परेशानी होती है इसलिए उन्हें ठंड से बचाकर रखें। इस दौरान सर्दी, जुकाम, बुखार जैसी बीमारियां बढ़ जाती हैं।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर डागर का कहना है कि शुक्रवार को अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस तो न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस रहा। वीरवार की तुलना में अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।
यह मौसम गेहूं की फसल के लिए अनुकूल है। कम से कम सप्ताह भर तक ऐसा मौसम रहना चाहिए ताकि फसल को नुकसान न हो।
डॉ. रमेश वर्मा, कृषि विशेषज्ञ