राइस मिलों को मिलिंग के लिए दिए गए 1509 किस्म की बोली के फैसले को लेकर मिलर्स द्वारा विमर्श किया जा रहा है। हालांकि अभी तक सरकार द्वारा इस संबंध में मिलर्स को सूचना नहीं दी गई है। लेकिन खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री द्वारा दी गई बोली करवाए जाने की सूचना के बाद से मिलर्स में इस बात को लेकर हड़कंप मचा हुआ है।
मिलर्स का कहना है कि सीजन से लेकर अब तक इस धान के रखरखाव एवं सुखाने पर उनका काफी खर्च हुआ है। इसके अलावा सीजन के समय 24 प्रतिशत से भी अधिक की नमी वाले भी धान को खरीदा गया था। जो अब सूख गया है।
इससे मिलर्स को काफी नुकसान होगा। मिलर्स इस धान के चावल को समय पर सरकार को दे देता। लेकिन अब यदि सरकार यही धान वापिस लेगी तो उन्हें काफी नुकसान होगा। राइस मिलर्स एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष मांगें राम खुरानिया ने कहा कि मिलर्स एसोसिएशन द्वारा इस मामले में विमर्श किया जा रहा है।
फिलहाल सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। क्योंकि अभी मिलर्स को इस बारे में सूचित नहीं किया गया है। सभी पक्षों से बातचीत कर अगला फैसला लिया जाएगा। वहीं चावल निर्यातक एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय सेतिया ने कहा कि यदि सरकार मिलर्स को दिए गए धान की बोली करवाती है तो मिलर्स को इसके रखरखाव एवं सूखने के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जाए।
विपक्ष द्वारा बेवजह मचाए गए हल्ले के बाद सरकार ऐसा कर रही है। सरकार को चाहिए कि वह मिलर्स, किसानों, आढ़तियों, मजदूरों के हितों को देखते हुए ठोस फैसला ले।
क्या है मामला
सीजन के समय 1509 किस्म को सरकार ने किसानों से खरीद कर मिलर्स को चावल निकालने के लिए दिया था। इसी बीच विपक्ष द्वारा 1509 की खरीद में घोटाले के आरोपों के बाद सरकार ने सभी मिलों में इस धान की फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई थी। मिलों में भेजे इस धान के स्टॉक को सील कर दिया गया था। अब सरकार ने इस स्टॉक की बोली करवाए जाने का फैसला लिया है। जिसे मिलर्स अपने लिए नुकसानदायक मान रहे हैं।