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जन्ममृत्यु प्रमाणपत्र बनाने में छूट रहे पसीने

Fri, 04 Dec 2015 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
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छह महीने से जिले में जन्म व मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया पर एक तरह से अघोषित रोक लगी हुई है जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। लोग कार्यालय के चक्कर काटकर थक चुके हैं लेकिन फाइलें सरकने का नाम नहीं ले रही हैं। इस समय पूरे जिले के करीब 3000 लोगों की फाइलें कार्रवाई के इंतजार में चंडीगढ़ में स्वास्थ्य विभाग कार्यालय, जिला स्वास्थ्य विभाग, एसडीएम कैथल एवं डीसी कार्यालय में धूल फांक रही हैं।
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जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया मई से पहले तक ठीक थी जिसमें स्वास्थ्य विभाग फाइल तैयार करके एसडीएम को भेज देता था। इसके बाद एसडीएम के हस्ताक्षर के बाद इन्हें वापस विभाग में भेज दिया जाता था तथा लोगों को प्रमाणपत्र मिल जाते थे लेकिन 15 मई, 2015 को सरकार के आदेश आए कि ये सभी फाइलें चंडीगढ़ में भेजी जाएंगी।

इसके बाद फाइल तैयार करके विभाग ने चंडीगढ़ भेजना शुरू कर दिया। वहां फाइलों के ढेर लग जाने के बाद विभाग ने छह अक्तूबर को फिर पत्र जारी करके फाइलों पर हस्ताक्षर करने की जिम्मेदारी सभी जिलों के डीसी को सौंप दी। इस पत्र को जारी हुए भी करीब छह माह बीत चुके हैं लेकिन अब तक फाइलों पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
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जिले में डीसी को फाइलें निकालने की पावर देने के बाद डीसी ने सीटीएम को पहले यह जिम्मेदारी सौंपी। वहां से काम न होने पर अब पुराने सिस्टम के अनुसार डीसी ने एसडीएम को फाइलें निकालने की जिम्मेदारी सौंपी है। अब देखना यह है कि यहां से फाइलें कब निकलना शुरू होंगी और लोगों को उनके प्रमाणपत्र कब मिलेंगे।

विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में देरी से जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने वालों की लगभग तीन हजार से अधिक फाइलें इस समय लंबित हैं।

देरी से जन्म एवं मृत्यु प्रमाणपत्र की फाइल बनवाना भी एक मुश्किल प्रक्रिया है जिसमें कागजात एकत्रित करना आवेदनकर्ता के लिए टेढ़ी खीर हो जाती है। इन लोगों ने फाइल बनाने की लंबी प्रक्रिया से गुजरने के बाद फाइल तो जमा करवा दीं लेकिन अब इन फाइलों पर प्रशासनिक अधिकारियों की नजरें इनायत होने की देर है।

स्वास्थ्य विभाग में जहां ये फाइलें जमा की जाती हैं तथा रिकॉर्ड में से देखकर प्रमाणपत्र तैयार किया जाता है वहां स्टाफ भी पूरा नहीं है। यहां रसीद-डिस्पेच के लिए कर्मचारी का पद खाली है। साथ ही पुरानी फाइलों में से नाम ढूंढने के लिए तीन क्लर्कों की आवश्यकता है। स्टाफ के नाम पर एसए, कंप्यूटर ऑपरेटर, डीपीए एवं एक सहायक है।

मैं अपने बेटे के जन्म प्रमाणपत्र में नाम ठीक करवाने के लिए चार माह से भटक रहा हूं लेकिन यह ठीक नहीं हो पा रहा। अभी भी न जाने कितना समय लगेगा। कई जगह इस प्रमाणपत्र की आवश्यकता पड़ती है।
चरण सिंह, सलेमपुर।

मैं अपने आठवीं कक्षा में पढ़ रहे बेटे के जन्म प्रमाणपत्र के लिए तीन साल से भटक रहा हूं। पहले तो कागजात ही पूरे नहीं हो पाए। बाद में कर्मचारियों से पूछकर किसी तरह पुराने समय के कागजात एकत्रित किए। इस प्रमाणपत्र की कई जगह आवश्यकता पड़ती है।
प्रवीण कुमार, सांघन

पहले फाइलें चंडीगढ़ जाती थीं। पिछले महीने ही डीसी स्तर पर फाइलों को निकालने की पावर सरकार द्वारा दी गई है। एसडीएम के माध्यम से फाइलें भेजने के लिए कहा गया है। फाइलों पर काम शुरू हो गया है। इस कारण कुछ देरी हुई है। प्रयास किया जा रहा है कि ये फाइलें जल्दी निकल जाएं और लोगों को उनके प्रमाणपत्र दे दिए जाएं।
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केएम पांडुरंग, डीसी कैथल।

फाइलें निकालनी शुरू कर दी गई हैं। बुधवार को भी काफी फाइलें निकाली गई हैं। प्रयास किया जाएगा कि हर रोज फाइलें निकलें ताकि लोग परेशान हों।
मनप्रीत कौर, एसडीएम, कैथल।
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